Friday, April 6, 2018

‘बहरों को आवाज सुनाने के लिए धमाकों के बहुत ऊंचे शब्दों की जरूरत होती है…’

साल 1928 था. इंडिया में अंग्रेजी हुकूमत थी. 30 अक्टूबर को साइमन कमीशन लाहौर पहुंचा. लाला लाजपत राय की अगुवाई में इंडियंस ने विरोध प्रदर्शन किया. क्रूर सुप्रीटेंडेंट जेम्स ए स्कॉट ने लाठीचार्ज का आदेश दिया. लोगों पर खूब लाठियां चलाई गईं. लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए. 18 दिन बाद लाला लाजपत राय ने दुनिया में अपनी आखिरी सांस ली.
लाला लाजपय राय की मौत से क्रांतिकारियों में गुस्सा भर गया. तय हुई कि बदला लिया जाएगा. भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद समेत कई क्रांतिकारियों ने मिलकर जेम्स स्कॉट को मारकर लालाजी की मौत का बदला लेने का फैसला किया. 17 दिसंबर 1928 दिन तय हुआ स्कॉट की हत्या के लिए. लेकिन निशानदेही में थोड़ी सी चूक हो गई. स्कॉट की जगह असिस्टेंट सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस जॉन पी सांडर्स क्रांतिकारियों का निशाना बन गए.
सांडर्स जब लाहौर के पुलिस हेडक्वार्टर से निकल रहे थे, तभी भगत सिंह और राजगुरु ने उन पर गोली चला दी. भगत सिंह पर कई किताब लिखने वाले जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर चमन लाल ने बताया, ‘सांडर्स पर सबसे पहले गोली राजगुरु ने चलाई थी, उसके बाद भगत सिंह ने सांडर्स पर गोली चलाई.’
सांडर्स की हत्या के बाद दोनों लाहौर से निकल लिए. अंग्रेजी हुकूमत सांडर्स की सरेआम हत्या से बौखला गई. भगत सिंह भगवती चरण वोहरा की वाइफ दुर्गावती देवी के साथ कपल की तरह और राजगुरु नौकर की वेशभूषा में लाहौर से निकल गए.
बहरों को आवाज सुनाने के लिए धमाके
अंग्रेज सरकार दो नए बिल ला रही थी. पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल. कहा जाता है कि ये दो कानून इंडियंस के लिए बेहद खतरनाक थे. सरकार इन्हें पास करने का फैसला ले चुकी थी. बिल के आने से क्रांतिकारियों के दमन की तैयारी थी. ये अप्रैल 1929 का वक्त था. तय हुआ कि असेंबली में बम फेंका जाएगा. किसी की जान लेने के लिए नहीं, बस सरकार और लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए. बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह इस काम के लिए चुने गए. 8 अप्रैल 1929 को जब दिल्ली की असेंबली में बिल पर बहस चल रही थी, तभी असेंबली के उस हिस्से में, जहां कोई नहीं बैठा हुआ था, वहां दोनों ने बम फेंककर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

क्यों हुई भगत सिंह की गिरफ्तारी?
कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि भगत सिंह को फांसी असेंबली पर बम फेंकने की वजह से हुई. पर ऐसा नहीं है. असेंबली में बम फेंकने के बाद बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह के पकड़े जाने के बाद क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी का दौर शुरू हुआ. राजगुरु को पुणे से अरेस्ट किया गया. सुखदेव भी अप्रैल महीने में ही लाहौर से गिरफ्तार कर लिए गए. भगत सिंह को पूरी तरह फंसाने के लिए अंग्रजी सरकार ने पुराने केस खंगालने शुरू कर दिए.
60 हजार रुपये में भगत सिंह की जमानत
अक्टूबर 1926 में दशहरे के मौके पर लाहौर में बम फटा. बम कांड में भगत सिंह को 26 मई 1927 को पहली बार गिरफ्तार किया गया. कुछ हफ्ते भगत सिंह को जेल में रखा गया. केस चला. बाद में सबूत न मिलने पर भगत सिंह को उस दौर में 60 हजार रुपये की जमानत पर रिहा किया गया.  भगत सिंह की बेड़ियों में जकड़ी ये तस्वीर उसी वक्त की है.

भगत सिंह को फांसी क्यों?
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त पर असेंबली में बम फेंकने का केस चला. लेकिन ब्रिटिश सरकार भगत सिंह के पीछे पड़ गई थी. सुखदेव और राजगुरु भी जेल में थे. सांडर्स की हत्या का दोषी तीनों को माना गया, जिसे लाहौर षडयंत्र केस माना गया. तीनों पर सांडर्स को मारने के अलावा देशद्रोह का केस चला. दोषी माना गया. बटुकेश्वर दत्त को असेंबली में बम फेंकने के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
7 अक्टूबर 1930 को फैसला सुनाया गया कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटकाया जाए. दिन तय हुआ 24 मार्च 1931.
भगत सिंह के डेथ सर्टिफिकेट के मुताबिक, भगत सिंह को एक घंटे तक फांसी के फंदे से लटकाए रखा गया
लेकिन अंग्रेज डरते थे कि कहीं बवाल न हो जाए. इसलिए 23 मार्च 1931 को शाम करीब साढ़े सात बजे ही तीनों को लाहौर की जेल में फांसी पर लटका दिया गया.
23 मार्च की अगली सुबह अखबार में भगत, सुखदेव और राजगुरु की फांसी की खबर
असेंबली पर भगत सिंह ने सिर्फ बम ही नहीं फेंका, पर्चे भी फेंके थे. जिसकी पहली लाइन थी. ‘बहरों को आवाज सुनाने के लिए धमाकों के बहुत ऊंचे शब्दों की जरूरत होती है…’ भगत सिंह बहरों को आवाज सुना चुके थे.

Wednesday, April 4, 2018

आईजी जोन वाराणसी को लिखे पत्र की प्रतिः
सेवा में, 
      पुलिस महानिरीक्षक,
      वाराणसी ज़ोन,
      वाराणसी। 
विषय- श्री मनीष कुमार सिंह,सूचना कार्यकर्ता,निवासी-ग्राम-गोतवां, पोस्ट-जमुआ बाजार, जिला-मीरजापुर, उत्तर प्रदेश को भदोही में आरटीआई मांगने पर पुलिस थाने में प्रताड़ित किये जाने 
महोदय, 
      कृपया निवेदन है कि मैं अमिताभ ठाकुर निवासी 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ हूँ और वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक, नागरिक सुरक्षा, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद पर कार्यरत हूँ. मैं यह पत्र आपको निजी हैसियत में एक आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ.
मुझे श्री मनीष कुमार सिंह, सूचना कार्यकर्ता, निवासी-ग्राम-गोतवां, पोश्ट-जमुआ बाजार, जिला-मीरजापुर, उत्तर प्रदेश मो० -9621800325, ईमेल- mirzapur.singh@gmail.com द्वारा पुलिस अधीक्षक, संत रविदास नगर को प्रेषित पत्र संख्या-02/02 दिनांक 24.08.2014 की प्रति उनके द्वारा ईमेल के जरिये प्राप्त हुआ है. (पत्र की प्रति संलग्न). इस पत्र के अनुसार श्री मनीष सूचना कार्यकर्ता हैं जिन्होंने जन सूचना अधिकारी, कार्यालय सन्तरविदास नगर भदोही के यहाँ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना प्राप्त करने हेतु पत्र संख्या 37 जनसूचना दिनांक-24/07/2014 द्वारा आवेदन किया था.
उन्हें उपरोक्त आवदेन पर सूचना प्रदान करने हेतु क्षेत्राधिकारी औराई कार्यालय से मो० नम्बर-8931057498 द्वारा दिनांक 23.08.2014 को फोन करके दिनांक 24.8.2014 को बुलाया गया. श्री मनीष दिनांक 24.08.2014 को समय लगभग 11.00 बजे क्षेत्राधिकारी औराई से मिले और क्षेत्राधिकारी औराई ने उनके आवेदन पत्र दिनांक 24.07.2014 पर की गयी कार्यवाही की मौखित जानकारी दी.
आवेदनपत्र के अनुसार क्षेत्राधिकारी औराई से मिलकर जैसी ही वे उनके कार्यालय के बाहर आये तो वहा पर मौजूद एक पुलिसकर्मी श्री जितेन्द्र यादव मो० -8115960014 ने कहा कि तुमको थानाध्यक्ष औराई बुला रहे हैं, वहां थाने में पहुचते ही सिपाही श्री जितेन्द्र यादव उन्हें गाली देते हुए माट-पीट करने लगे और कहने लगे, बहुत बड़का पत्रकार बनता है, मेरे खिलाफ आरटीआई फाइल करता हैं चल तुझे मैं आज बताता हॅू. श्री जितेन्द्र यादव ने उन्हें ले जाकर कथित रूप से थाने में जबरदस्ती बैठा दिया और उनका  मोबाईल छिन कर स्वीच आफ कर दिया.
थानाध्यक्ष की अनुपस्थिती में उन्हें थाने में जबरजस्ती बैठाया गया और थाने के ज्यादातर पुलिसकर्मीयों द्वारा उन्हें भला-बुरा कहा गया. किसी तरह क्षेत्राधिकारी को सूचना होने पर उन्होने श्री मनीष को छुड़वाया और श्री जितेन्द्र यादव से उनका मोबाईल दिलवाया परन्तु क्षेत्राधिकारी औराई ने उक्त सिपाही के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की.
 
श्री मनीष का यह पत्र प्राप्त होने के बाद मैंने स्वयं श्री मनीष से फोन से बात की जिन्होंने पूरी घटना की मुझसे फोन पर पुष्टि की. फिर मैंने क्षेत्राधिकारी ओराई, जनपद संत रविदासनगर से उनके फोन पर बात की और उन्होंने मुझे भी यह कहा था कि श्री मनीष उनके पास एक आरटीआई प्रार्थनापत्र के सन्दर्भ में आये थे. उन्होंने मुझे यह भी कहा था कि उन्होंने अपने स्तर से श्री जीतेन्द्र से श्री मनीष को उनका मोबाइल वापस दिलवाया था और उन्हें अपने स्तर से श्री जीतेन्द्र को डांट-फटकार भी लगाई थी.
उपरोक्त तथ्यों से प्रथमद्रष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि श्री मनीष की बातों में काफी कुछ तथ्यात्मक सच्चाई है. मैं निवेदन करना चाहूँगा कि यदि श्री मनीष की कही बातें सही हैं तो यह अपने आप में एक अत्यंत गंम्भीर घटना मानी जाएगी जहां एक व्यक्ति को एक पुलिसकर्मी द्वारा मात्र इस आधार पर प्रताड़ित किया गया कि उसने उस पुलिसवाले के खिलाफ आरटीआई मांगने की हिम्मत और गुस्ताखी की. यह भी कहना चाहूँगा कि यदि यह घटना सही है तो मात्र मोबाइल वापस दिलाया जाना और डांट-डपट किसी भी प्रकार से पर्याप्त नहीं माना जाएगा क्योंकि श्री मनीष ने जैसा कि मुझे भी फोन पर बताया कि श्री जीतेन्द्र ने थाने में बुला कर श्री मनीष को गाली-गलौज किया, उनसे माट-पीट की, उन्हें आरटीआई फाइल करने पर बुरी तरह जलील किया, थाने में जबरजस्ती बैठा दिया और उनका मोबाईल छिन कर स्वीच आफ कर दिया.
यदि जैसा श्री मनीष कह रहे हैं कि उन्हें थाने में जबरदस्ती बैठाया गया और थाने के ज्यादातर पुलिसकर्मीयों द्वारा उन्हें भला-बुरा कहा गया और वह भी मात्र इसलिए कि श्री मनीष ने एक पुलिसवाले के खिलाफ आरटीआई मांगने की गलती की थी तो यह अपने आप में अत्यंत ही गंभीर और व्यापक प्रश्न लिए प्रकरण है और यह मात्र श्री मनीष और श्री जीतेन्द्र का मामला नहीं है बल्कि पुलिस और प्रशासन के कुछ अधिकारियों द्वारा इस प्रकार का आरटीआई मांगने वाले को प्रताड़ित करने, उनके साथ आपराधिक कृत्य करने और सीधे-सीधे अपने पद का दुरुपयोग कर ऐसा कुकृत्य करने के व्यापक प्रश्नों से जुड़ा प्रकरण है.
अतः मैं आपसे निवेदन करूँगा कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कम से कम अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराते हुए मामले में श्री मनीष कुमार सिंह को न्याय दिलाने की कृपा करें ताकि इस के माध्यम से लोगों में सही सन्देश जाए और पुनः कोई पुलिसकर्मी अपनी राजकीय सत्ता अथवा अपने शासकीय अधिकारों का दुरुपयोग करने का अनुचित कृत्य ना कर सके.
पत्र संख्या- AT/Insurance/HZG
दिनांक- 04/08/2014
भवदीय,
(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ 
#094155-34526
XXXXXX
पत्र संख्या-02/02 दिनांक 24.08.2014
प्रेषक- मनीष कुमार सिंह, सूचना कार्यकर्ता एवं संवाददाता जनवार्ता हिन्दी दैनिक, निवासी-ग्राम-गोतवां, पोस्ट- जमुआ बाजार, जिला-मीरजापुर, उत्तर प्रदेश, पिन-231314 मो- 9621800325, ईमेल- mirzapur.singh@gmail.com
सेवा में
      पुलिस अधीक्षक,
      सन्तरविदास नगर, भदोही।
विषय- क्षेत्राधिकारी औराई कार्यालय बुलाकर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के सम्बन्ध में।
महोदय,
      निवेदन है कि प्रार्थी सूचना कार्यकर्ता है प्रार्थी ने जन सूचना अधिकारी, कार्यालय सन्तरविदास नगर भदोही के यहाँ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना प्राप्त करने हेतु पत्र संख्या 37 जनसूचना दिनांक-24/07/2014 द्वारा आवेदन किया हुआ है।
प्रार्थी के उपरोक्त आवदेन पर सूचना प्रदान करने हेतु क्षेत्राधिकारी औराई कार्यालय से मो० नम्बर-8931057498 द्वारा दिनांक 23.08.2014 को फोन करके आज दिनांक-24.8.2014 को बुलाया गया। प्रार्थी आज दिनांक 24.08.2014 को समय लगभग 11.00 बजे क्षेत्राधिकारी औराई से मिला और क्षेत्राधिकारी औराई ने मेरे आवेदन पत्र दिनांक 24.07.2014 पर की गयी कार्यवाही की मौखित जानकारी दी।
क्षेत्राधिकारी औराई से मिलकर जैसी ही मैं उनके कार्यालय के बाहर आया तो वहा पर मौजूद एक पुलिसकर्मी जितेन्द्र यादव मो० -8115960014 ने कहा की तुमको थानाध्यक्ष औराई बुला रहे हैं चल के मिल लिजिए, तो मैंने जीतेन्द्र यादव से कहा कि चलिए मैं अपनी मोटरसाइकिल से आता हूँ, तो जितेन्द्र यादव ने कहा की नही क्षेत्राधिकारी औराई कार्यालय के पिछे से ही एक शॉर्टकट रास्ता हैं इधर से चलिए। क्षेत्राधिकारी औराई कार्यालय के पीछे पहुंचते की सिपाही जितेन्द्र यादव मुझे गाली देते हुए माट-पीट करने लगा और कहने लगा बहुत बड़का पत्रकार बनता हैं मेरे खिलाफ आरटीआई फाइल करता हैं चल तुझे मैं आज बताता हॅू।
जितेन्द्र यादव ने मुझे ले जाकर थाने में जबरजस्ती बैठा दिया और मेरा मोबाईल छिन कर स्विच ऑफ कर दिया। थानाध्यक्ष की अनुपस्थिती में मुझे थाने में जबरजस्ती बैठाया गया और थाने के ज्यादातर पुलिसकर्मियों द्वारा मुझे भला-बुरा कहा गया। किसी तरह क्षेत्राधिकारी को सूचना होने पर उन्होने मुझे छुड़वाया और जितेन्द्र यादव से मेरा मोबाईल दिलवाया। परन्तु मेरे द्वारा क्षेत्राधिकारी औराई से अनुरोध करने के बाद भी उन्होने उक्त सिपाही के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की।
सिपाही जितेन्द यादव ने प्रार्थी से साथ मार-पीट की जिसके लिए धारा 323 भा0द0स0, गाली-गलौझ जिसके लिए-504 भा0द0स0, धमकी जिसके लिए धारा 506 भा0द0स0, जबरजस्ती बिना कारण थाने में बन्धक बनाये रखना जिसके लिए धारा 362 भा0द0स0, द्वारा अपने पद का गलत इस्तेमाल करना धारा 166 भा0द0स0 व पुलिस सेवा नियमावली के तहत दोषी हैं।
अतः दोषी के खिलाफ उपर्युक्त व अन्य धाराओं के तहत कार्यवाही करने की कृपा करें।
प्रार्थी
(मनीष कुमार सिंह)

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद


नई दिल्ली.एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों का सोमवार को भारत बंद का असर देश के 12 राज्यों में देखा गया। इनमें से उन राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसा और प्रदर्शन देखने को मिला, जहां इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं। इनमें मध्यप्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। इनके अलावा पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक झड़प हुईं। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में एक की मौत हो गई। उधर, पंजाब में बंद के चलते सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। इसकी खास वजह है। दरअसल, जिन राज्यों में उग्र प्रदर्शन हुए वहां की 71 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एससी/एसटी वोटर असर डालते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
-सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं।
- सरकारी कर्मी के लिए: तुरंत गिरफ्तारी नहीं। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी।
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आम लोगों के लिए: एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी।
- अदालतों के लिए: अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे।
- एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट बताती है कि देशभर में जातिसूचक गाली-गलौच के 11,060 शिकायतें दर्ज हुईं। जांच में 935 झूठी पाई गईं।
दलित संगठनों की क्या मांग है?
- संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू हों।
सरकार ने क्या किया?
-सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए एक याचिका दायर की। कोर्ट ने सोमवार को फौरन सुनवाई से मना कर दिया।
13 दिन में आंदोलन के साथ आ गए सियासी दल
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देश में एससी/एसटी की आबादी 20 करोड़ और लोकसभा में इस वर्ग से 131 सांसद (एससी के 84 और एसटी के 47) हैं।
- इस बड़े वर्ग से जुड़े इस मामले से हर दल के हित हैं। इसी वजह से कांग्रेस समेत बड़े विपक्षी दलों ने उसके आंदोलन को समर्थन दिया। भाजपा के सबसे ज्यादा 67 सांसद इसी वर्ग से हैं।
सबसे ज्यादा असर एमपी-राजस्थानऔर छत्तीसगढ़में,क्योंकि इस साल यहां चुनाव होने हैं...
1) मध्यप्रदेश के भिंंड, मुरैना ग्वालियर में ज्यादा हिंसा
-राज्य के करीब 14 से ज्यादा जिलों में विरोध-प्रदर्शन देखा गया। ग्वालियर, भिंड और मुरैना में भारी हिंसा हुई। ग्वालियर में हिंसा के दौरान तीन लोग मारे गए। टोल प्लाजा में तोड़फोड़ की गई। कई जगह सड़क पर वाहन जलाए गए। पांच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया। वॉटसऐप पर गलत खबरें और अफवाहें ना फैलें इसके लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया। प्रदेश के इंदौर, सिवनी, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ और जबलपुर में बंद का मिला-जुला असर रहा।
- ग्वालियर में 2, भिण्ड में 2, डबरा में 1और मुरैना में 1की मौत हुई।
क्यों हैं एससी/एसटी अहम? 
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राज्य में साल के आखिर में चुनाव हैं। विधानसभा की कुल 230 सीटों में से एसटी के लिए 47 और एससी की 35 सीट रिजर्व हैं।
2) राजस्थान के अलवर में एक की मौत, महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं
- अलवर जिले के खैरथल इलाके हुई हिंसा में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। बाड़मेर में दलित संगठनों और करणी सेना के बीच झड़प हो गई, जिसमें 25 लोग जख्मी हो गए। भरतपुर में महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करती दिखीं।
- अलवर में एक मकान में आग लगाने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में आग लगा दी। पुष्कर में कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
क्यों एससी/एसटी अहम?
-
राज्य में इस साल चुनाव हैं। विधानसभा की 200 सीट में से एससी कोटे की 33 और एसटी की 25 सीटें हैं। पिछले तीन चुनावों में टिकट बंटवारे से लेकर सरकार गठन तक एससी-एसटी और जाटों का ही बोलबाला रहा है। कांग्रेस और भाजपा ने 95 से ज्यादा सीटों पर इन्हीं समुदाय के कैंडिडेट्स मैदान में उतारे। बाकी आधी सीटों का राजपूत, ब्राह्मण, मुस्लिम, गुर्जर और दूसरी जातियों को अहमियत दी गई है।
3) छत्तीसगढ़ में आधी सीटें एससी/एसटी असर वाली
-प्रदेश में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई समेत राज्य में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मेडिकल स्टोर को छोड़कर करीब-करीब सभी बाजार बंद नजर आए। हालांकि, राज्य से हिंसा की कोई खबर नहीं मिली।
- कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए।
क्यों हैं एससी/एसटी अहम?
-छतीसगढ़ में कुल 90 सीटें हैं। इनमें से एससी के लिए 10 और एसटी के लिए 29 सीटें रिजर्व हैं। अगर देखा जाए तो करीब आधी सीटों पर एससी/एसटी का असर है।
बाकी 7 राज्यों में क्या रहे हालात?
4) पंजाब: सदा-ए-सरहद बस रोकी, 10वी-12वीं की परीक्षाएंटालीं
- सभी स्कूल-कॉलेज, यूनिवर्सिटी और बैंक बंद रहे। सीबीएसई की 10वी-12वीं की परीक्षाएं टाली गईं। रात 11 बजे तक बसें और इंटरनेट बंद रहने के आदेश दिए गए। सुरक्षा बलों के 12 हजार अतिरिक्त जवानों को फील्ड में उतारा गया।
- दिल्ली और लाहौर के बीच चलने वाली सदा-ए-सरहद बस सेवा भी बाधित हुई। पाकिस्तान जाने वाली बस को पहले पंजाब के सरहिंद में रोका गया। बाद में इसे पटियाला-संगरूर के रास्ते लाहौर रवाना किया। वहीं, दिल्ली आने वाली बसों को अमृतसर में रोक दिया गया।
5) बिहार: एंबुलेंसफंसने से एक बच्चे की मौत
-मधुबनी, आरा, भागलपुर और अररिया में ट्रेनें रोकी गईं। मोतिहारी में तोड़फोड़ की गई।
- वैशाली में प्रदर्शनकारियों ने एक एंबुलेंस को रोक लिया। मां गुहार लगाती रही, लेकिन जाम में फंसे रहने के चलते एक नवजात की मौत हो गई।
6) उत्तर प्रदेश: दोकी मौत, 3 जख्मी
- यूपी के मुजफ्फरनगर में एक शख्स की मौत हो गई। वहीं, तीन जख्मी हो गए। मेरठ, गोरखपुर, सहारनपुर, हापुड़, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मथुरा और आगरा समेत कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया।
- मथुरा, हापुड़ और मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ करने के साथ वाहनों और पुलिस थाने में आग लगाई। आग बुझाने पहुंची दमकल की टीम पर पथराव हुआ।
- बिजनौर में एक बीमार व्यक्ति की रैली के दौरान फंसने से मौत गई।
7) झारखंड:जबरन बाजार बंद कराए,ट्रेनें रोकी गईं
-सड़कों पर जाम लगाया गया। कई जगहें ट्रेनें रोकी गईं। प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए। रांची में पुलिस पर पथराव हुआ। जमशेदपुर में एक ट्रक में आग लगा दी गई।
8) गुजरात:अहमदाबाद में बसों पर पथराव, राजकोट में भी तोड़फोड़
- अहमदाबाद में बस सर्विस को बंद करना पड़ा। कई जगह पथराव किया गया। आंदोलनकारियों ने पाटन, हिम्मतनगर, थराद, नवसारी, भरूच, जूनागढ़, धानेरा, भावनगर, जामनगर, अमरेली, तापी, साणंद के अलावा राज्य के और भी इलाकों में रैलियां निकाली गईं। 
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कच्छ जिले के गांधीधाम शहर में सरकारी वाहन पर पथराव किया गया। जूनागढ़, राजकोट, राजुला, चोटिला के अलावा दूसरे इलाकों से भी आगजनी और पथराव की खबरें आईं। 
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सौराष्ट्र, कच्छ और राजकोट में भी आगजनी-तोड़फोड़ की गई।
9) हरियाणा:पुलिस ने की फायरिंग, पथराव में 50 पुलिसकर्मी जख्मी
- नेशनल हाइवे -1 बंद कर दिया गया। कैथल में प्रदर्शनकारी रोडवेज डिपो में घुस गए। यहां टिकट काउंटरों पर तोड़फोड़ की गई। एक ट्रेन इंजन पर पथराव किया गया। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। यहां पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प। पुलिस फायरिंग में 10 लोग घायल हुए। पथराव में 50 पुलिसकर्मी जख्मी हुए।
10. ओडिशा: प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोकीं।
राहुल गांधी ने कहा-दलितों को सलाम, संघ का पटलवार
- राहुल ने ट्वीट में कहा- "दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना RSS/BJP के DNA में है। जो इस सोच को चुनौती देता है उसे वे हिंसा से दबाते हैं। हजारों दलित भाई-बहन आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं। हम उनको सलाम करते हैं।"
- उधर, संघ ने पटलवार करते हुए कहा कि कुछ लोग आरएसएस के खिलाफ जहरीला कैम्पेन चला रहे हैं। कानून में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संघ से कोई लेना देना नहीं है।