Tuesday, June 24, 2014

दो ग्रहों की युती के फल

जानीये दो ग्रहों की युती के फल :-
१.       सूर्य+बुध = विद्या , बुद्धि देता है, सरकारी नौकरी, ज्योतिष , अपने प्रयास से धनवान , बचपन में कष्ट. 
२. सूर्य+शुक्र =कला, साहित्य, यांत्रिक कला का ज्ञान , क्रोध, प्रेम सम्बन्ध , बुरे, गृहस्थ बुरा , संतान में देरी , तपेदिक , पिता के लिए अशुभ। 
३. सूर्य+गुरू =मान-मर्यादा , श्रेष्टता , उच्च पद तथा यश में वृद्धि करता है, स्वयं की मेहनत से सफलता। 
४. सूर्य+ मंगल =साहसी , अग्नि से सम्बंधित कामों में सफलता , सर्जन , डॉक्टर , अधिकारी , सर में चोट, का निशान , दुर्घटना , खुद का मकान बनाये। 
५. सूर्य+चन्द्र =राजकीय ठाठ - बाठ , अधिकार, पद, उत्तम राजयोग , डॉक्टर , दो विवाह , गृहस्थ जीवन हल्का , स्त्रीयों द्वारा विरोध, बुढ़ापा उत्तम। 
६. सूर्य+शनि =पिता-पुत्र में बिगाड़ अथवा जुदाई। युवावस्था में संकट, राज दरबार बुरा। स्वास्थ कमजोर। पिता की मृत्यु , गरीबी। घरेलू अशांति। पत्नी का स्वास्थ कमजोर। 
७. सूर्य+राहू =सरकारी नौकरी में परेशानी। चमड़ी पर दाग , खर्च हो। घरेलू अशांति , परिवार की बदनामी का डर। श्वसुर की धन की स्थिति कमजोर। सूर्य को ग्रहण। 
८. सूर्य+केतू=सरकारी काम अथवा सरकारी नौकरी में उतार-चढ़ाव। संतान का फल बुरा। 
९. चन्द्रमा+मंगल=मन की स्थिति डांवाडोल। दुर्घटना। साहसिक कामों से धन लाभ। उत्तम धन। 
१०. चन्द्र+बुध=उत्तम वक्ता। बुद्धिमत्ता। लेखन शक्ति। गहन चिंतन। स्वास्थ में गड़बड़। दो विवाह योग। मानसिक असंतुलन। 
११. चन्द्र+गुरू= उत्तम स्थिति। धन प्राप्ति। बैंक में अधिकारी। उच्च पद। मान-सम्मान। धनी। यदि पाप दृष्टी हो तो विद्द्या में रूकावट। 
१२. चन्द्र+शुक्र=दो विवाह योग। अन्य स्त्री से सम्बन्ध। विलासी। शान-शौकत का प्रेमी। रात का सुख।
१३. यदि सप्तम भाव में शनि +चन्द्र की युती जातक को विधवा स्त्री दिलवा देते है।
१४. लग्न (१) भाव में सूर्य+राहू की युती दाम्पत्य जीवन में बाधा डालते है। 

१५. सप्तम भाव में बुध +शुक्र की युती ४५-५० साल की उम्र में पत्नी सुख मिलता है।

दाम्पत्य जीवन के बारे में

जानिये दाम्पत्य जीवन के बारे में :-
१. चन्द्र +राहू युति होतो - मानसिक चिंता , पति / पत्नी की मानसिक स्थिति में असंतुलन होता है। 
२. मंगल+राहू की युति से - अड़ियल स्वभाव अथवा एक दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचाना।
३. शुक्र +राहू की युति से - जातक के पत्नी के अलावा अन्य स्त्री से सम्बन्ध के कारण अथवा माता-पिता की इच्छा के बिना विवाह कारण तलाक। 
४. सूर्य+राहू - पति, पत्नि के पद , ओहदे अथवा आर्थिक स्थिति को लेकर मतभेद , तथा तलाक की नौबत।
५. शनि +राहू - एक दूसरे से अलग रहने के कारण , अशांति तथा तलाक।
६. बुध+राहू -दिमागी सोच में असमानता के कारण अशांति तथा तलाक।
७. मंगल+शुक्र+राहू -घरेलू अशांति -दुःख तथा अंत तलाक।
८. शुक्र+चन्द्र +राहू - प्रेम में घाटा ही घाटा। स्त्रीयों से हानि, घरेलू अशांति। पराई औरतों से सम्बन्ध अंत में तलाक।
यदि उपरोक्त ग्रह योग २-७ -११ वे भाव में होतो , ज्यादा प्रभावशाली है
(उपरोक्त योग होने पर अंत तलाक में होता है )

Saturday, June 21, 2014

राहू की अन्य ग्रह युति से फल

१. चन्द्र +राहू युति होतो – मानसिक चिंता , पति /
पत्नी की मानसिक स्थिति में असंतुलन
होता है।
२. मंगल+राहू की युति से – अड़ियल स्वभाव
अथवा एक दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचाना।
३. शुक्र +राहू की युति से – जातक के
पत्नी के अलावा अन्य स्त्री से
सम्बन्ध के कारण अथवा माता-पिता की इच्छा के
बिना विवाह कारण तलाक।
४. सूर्य+राहू – पति, पत्नि के पद , ओहदे अथवा आर्थिक
स्थिति को लेकर मतभेद , तथा तलाक की नौबत।
५. शनि +राहू – एक दूसरे से अलग रहने के कारण ,
अशांति तथा तलाक।
६. बुध+राहू -दिमागी सोच में असमानता के कारण
अशांति तथा तलाक।
७. मंगल+शुक्र+राहू -घरेलू अशांति -दुःख तथा अंत तलाक।
८. शुक्र+चन्द्र +राहू – प्रेम में घाटा ही घाटा।
स्त्रीयों से हानि, घरेलू अशांति। पराई औरतों से
सम्बन्ध अंत में तलाक।
यदि उपरोक्त ग्रह योग २-७ -११ वे भाव में होतो ,
ज्यादा प्रभावशाली है
(उपरोक्त योग होने पर अंत तलाक में होता है )

मोरपंख " का बहुत महत्व

= आज चर्चा . . हमारे भारत के राष्ट्रीय
पक्षी " मोर " के पंख की . .
.
= ज्योतिष में " मोरपंख " का बहुत महत्व है . .स्वयम् भगवान
कृष्ण ने अपने मुकुट में इसे धारण किया . . " मोरपंख " के प्रयोग से
हम अपने जीवन को संवार सकते है . .
.
= " मोरपंख " घर के दक्षिण-पूर्व कोण में लगाने से बरकत
बढती है. . . व अचानक कष्ट
नहीं आता है. .
.
= यदि मोर का एक पंख किसी मंदिर में
श्री राधा-कृष्ण कि मूर्ति के मुकुट में 40 दिन के लिए
स्थापित कर प्रतिदिन मक्खन-मिश्री का भोग सांयकाल
को लगाए . . 41 वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से
दक्षिणा-भोग दे कर घर लाकर अपने खजाने या लाकर्स में स्थापित
करें. . तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे कि धन,सुख-
शान्ति कि वृद्धि हो रही है. सभी रुके कार्य
भी इस प्रयोग के कारण बनते जा रहे है . . .
.
= काल-सर्प के दोष को भी दूर करने की इस
मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है.काल-सर्प वाले व्यक्ति को अपने
तकिये के खौल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार रात्रि काल में डालें
तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे. . . और अपने
बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख
का पंखा जिसमे कम से कम 11 मोर के पंख को लगा देने से काल सर्प
दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है. .
= बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे
ताकि पंखा चलने पर मोर के
पंखो की भी हवा बच्चे को लगे
धीरे-धीरे हठ व जिद्द कम
होती जायेगी. . .
= मोर व सर्प में शत्रुता होती है अर्थात सर्प,
शनि तथा राहू के संयोग से बनता है. यदि मोर का पंख घर के
पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में
या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू
का दोष कभी भी नहीं परेशान
करता है. तथा घर में सर्प, मच्छर, बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का भय
नहीं रहता है . .

Friday, June 20, 2014

9 महीने 9 दिन गर्भ मे बच्चा क्यो रहता है क्या है बच्चे को महान बनाने का वैज्ञानिक उपाय ?

9 महीने 9 दिन गर्भ मे बच्चा क्यो रहता है क्या है
बच्चे को महान बनाने का वैज्ञानिक उपाय ?
लोग ज्योतिष पर बहुत कम विश्वास करते है क्योकि ज्योतिषियों ने
ही ज्योतिष का विनाश किया है । उनके अधूरे ज्ञान के
कारण ऐसा हुआ है । गर्भ मे बच्चा 9 महीने और 9
दिन ही क्यो रहता है । इसका एक वैज्ञानिक आधार
है । हमारे ब्रह्मांड के 9 ग्रह
अपनी अपनी किरणों से गर्भ मे पल रहे
बच्चे को विकसित करते है । हर ग्रह अपने स्वभाव के अनुरूप
बच्चे के शरीर के भागो को विकसित करता है । अगर कोई
ग्रह गर्भ मे पल रहे बच्चे के समय कमजोर है तो उपाय से
उसको ठीक किया जा सकता है ।
गर्भ से 1 महीने तक शुक्र का प्रभाव रहता है ।
अगर गर्भावस्था के समय शुक्र कमजोर है तो शुक्र को मजबूत
करना चाहिए । अगर शुक्र मजबूत होगा तो बच्चा बहुत सुंदर
होगा । और उस समय
स्त्री को चटपटी चीजे
खानी चाहिए । शुक्र का दान न करे । अगर दान
किया तो शुक्र कमजोर हो जाएगा । कुछ
अनाड़ी ज्योतिषी अधूरे ज्ञान के कारण शुक्र
का दान करा देते है । दान सिर्फ उसी ग्रह का करे
जो पापी और क्रूर हो और उसके कारण गर्भपात
का खतरा हो ।
दूसरे महीने मंगल का प्रभाव रहता है ।
मीठा खा कर मंगल को मजबूत करे ।तथा लाल वस्त्र
ज्यादा धारण करे ।
तीसरे महीने गुरु का प्रभाव रहता है । दूध
और मीठे से बनी मिठाई या पकवान का सेवन
करे तथा पीले वस्त्र ज्यादा धारण करे ।
चौथे महीने सूर्य का प्रभाव रहता है । रसों का सेवन
करे तथा महरून वस्त्र ज्यादा धारण करे ।
पांचवे महीने चंद्र का प्रभाव रहता है । दूध और
दहि तथा चावल तथा सफ़ेद चीजों का सेवन करे तथा सफ़ेद
ज्यादा वस्त्र धारण करे ।

छटे महीने शनि का प्रभाव रहता है ।
कशीली चीजों केल्शियम और
रसों के सेवन करे तथा आसमानी वस्त्र ज्यादा धारण करे
।।
सातवे महीने बुध का प्रभाव रहता है । जूस और
फलों का खूब सेवन करे तथा हरे रंग के वस्त्र ज्यादा धारण करे ।।
आठवे महीने फिर चंद्र का तथा नौवे महीने
सूर्य का प्रभाव रहता है । इस दौरान अगर कोई ग्रह
नीच राशि गत भ्रमण कर रहा है तो उसका पूरे
महीने यज्ञ करन चाहिए । जितना गर्भ
ग्रहों की किरणों से
तपेगा उतना ही बच्चा महान और
मेधावी होगा । जैसी एक
मुर्गी अपने अंडे को ज्यादा हीट
देती है तो उसका बच्चा मजबूत पैदा होता है । अगर
हीट कम देगी तो उसका चूजा बहुत कमजोर
होगा । उसी प्रकार माँ का गर्भ
ग्रहों की किरणों से
जितना तपेगा बच्चा उतना ही मजबूत होगा । जैसे
गांधारी की आँखों की किरणों के
तेज़ से दुर्योधन का शरीर वज्र का हो गया था ।


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Saturday, May 24, 2014

कुंडली के योग से जानिए पूर्वजन्म के राज़, कौन थे आप पिछले जन्म में!

कुंडली के योग से जानिए पूर्वजन्म के राज़, कौन थे आप पिछले जन्म में!
उज्जैन। हिंदू धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार प्राणी का केवल शरीर नष्ट होता है, आत्मा अमर है। आत्मा एक शरीर के नष्ट हो जाने पर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है, इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। पुनर्जन्म के सिद्धांत को लेकर सभी के मन ये जानने की जिज्ञासा अवश्य रहती है कि पूर्वजन्म में वे क्या थे साथ ही वे ये भी जानना चाहते हैं, वर्तमान शरीर की मृत्यु हो जाने पर इस आत्मा का क्या होगा?
भारतीय ज्योतिष में इस विषय पर भी काफी शोध किया गया है। उसके अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुंडली देखकर उसके पूर्व जन्म और मृत्यु के बाद आत्मा की गति के बारे में जाना जा सकता है। गीताप्रेस गोरखपुर दवारा प्रकाशित परलोक और पुनर्जन्मांक पुस्तक में इस विषय पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया है।
उसके अनुसार शिशु जिस समय जन्म लेता है। उस समय, स्थान व तिथि को देखकर उसकी जन्म कुंडली बनाई जाती है। उस समय के ग्रहों की स्थिति के अध्ययन के फलस्वरूप यह जाना जा सकता है कि बालक किस योनि से आया है और मृत्यु के बाद उसकी क्या गति होगी। आगे इस संबंध में कुछ विशेष योग बताए जा रहे हैं-
जन्मपूर्व योनि विचार
1- जिस व्यक्ति की कुंडली में चार या इससे अधिक ग्रह उच्च राशि के अथवा स्वराशि के हों तो उस व्यक्ति ने उत्तम योनि भोगकर यहां जन्म लिया है, ऐसा ज्योतिषियों का मानना है।
2- लग्न में उच्च राशि का चंद्रमा हो तो ऐसा व्यक्ति पूर्वजन्म में योग्य वणिक था, ऐसा मानना चाहिए।
3- लग्नस्थ गुरु इस बात का सूचक है कि जन्म लेने वाला पूर्वजन्म में वेदपाठी ब्राह्मण था। यदि जन्मकुंडली में कहीं भी उच्च का गुरु होकर लग्न को देख रहा हो तो बालक पूर्वजन्म में धर्मात्मा, सद्गुणी एवं विवेकशील साधु अथवा तपस्वी था, ऐसा मानना चाहिए।
4- यदि जन्म कुंडली में सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो अथवा तुला राशि का हो तो व्यक्ति पूर्वजन्म में भ्रष्ट जीवन व्यतीत करना वाला था, ऐसा मानना चाहिए।
5- लग्न या सप्तम भाव में यदि शुक्र हो तो जातक पूर्वजन्म में राजा अथवा सेठ था व जीवन के सभी सुख भोगने वाला था, ऐसा समझना चाहिए।
6- लग्न, एकादश, सप्तम या चौथे भाव में शनि इस बात का सूचक है कि व्यक्ति पूर्वजन्म में शुद्र परिवार से संबंधित था एवं पापपूर्ण कार्यों में लिप्त था।
7- यदि लग्न या सप्तम भाव में राहु हो तो व्यक्ति की पूर्व मृत्यु स्वभाविक रूप से नहीं हुई, ऐसा ज्योतिषियों का मत है।
8- चार या इससे अधिक ग्रह जन्म कुंडली में नीच राशि के हों तो ऐसे व्यक्ति ने पूर्वजन्म में निश्चय ही आत्महत्या की होगी, ऐसा मानना चाहिए।
9- कुंडली में स्थित लग्नस्थ बुध स्पष्ट करता है कि व्यक्ति पूर्वजन्म में वणिक पुत्र था एवं विविध क्लेशों से ग्रस्त रहता था।
10- सप्तम भाव, छठे भाव या दशम भाव में मंगल की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह व्यक्ति पूर्वजन्म में क्रोधी स्वभाव का था तथा कई लोग इससे पीडि़त रहते थे।
11- गुरु शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या पंचम या नवम भाव में हो तो जातक पूर्वजन्म में संन्यासी था, ऐसा मानना चाहिए।
12- कुंडली के ग्यारहवे भाव में सूर्य, पांचवे में गुरु तथा बारहवें में शुक्र इस बात का सूचक है कि यह व्यक्ति पूर्वजन्म में धर्मात्मा प्रवृत्ति का तथा लोगों की मदद करने वाला था, ऐसा ज्योतिषियों का मानना है।
मृत्यु उपरांत गति विचार
मृत्यु के बाद आत्मा की क्या गति होगी या वह पुन: किस रूप में जन्म लेगी, इसके बारे में भी जन्म कुंडली देखकर जाना जा सकता है। आगे इसी से संबंधित कुछ प्रमाणिक योग बताए जा रहे हैं-
1- कुंडली में कहीं पर भी यदि कर्क राशि में गुरु स्थित हो तो जातक मृत्यु के बाद उत्तम कुल में जन्म लेता है।
2- लग्न में उच्च राशि का चंद्रमा हो तथा कोई पापग्रह उसे न देखते हों तो ऐसे व्यक्ति को मृत्यु के बाद सद्गति प्राप्त होती है।
3- अष्टमस्थ राहु जातक को पुण्यात्मा बना देता है तथा मरने के बाद वह राजकुल में जन्म लेता है, ऐसा विद्वानों का कथन है।
4- अष्टम भाव पर मंगल की दृष्टि हो तथा लग्नस्थ मंगल पर नीच शनि की दृष्टि हो तो जातक रौरव नरक भोगता है।
5- अष्टमस्थ शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो तो जातक मृत्यु के बाद वैश्य कुल में जन्म लेता है।
6- अष्टम भाव पर मंगल और शनि, इन दोनों ग्रहों की पूर्ण दृष्टि हो तो जातक की अकाल मृत्यु होती है।
7- अष्टम भाव पर शुभ अथवा अशुभ किसी भी प्रकार के ग्रह की दृष्टि न हो और न अष्टम भाव में कोई ग्रह स्थित हो तो जातक ब्रह्मलोक प्राप्त करता है।
8- लग्न में गुरु-चंद्र, चतुर्थ भाव में तुला का शनि एवं सप्तम भाव में मकर राशि का मंगल हो तो जातक जीवन में कीर्ति अर्जित करता हुआ मृत्यु उपरांत ब्रह्मलीन होता है अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
9- लग्न में उच्च का गुरु चंद्र को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो एवं अष्टम स्थान ग्रहों से रिक्त हो तो जातक जीवन में सैकड़ों धार्मिक कार्य करता है तथा प्रबल पुण्यात्मा एवं मृत्यु के बाद सद्गति प्राप्त करता है।
विशेष योग
1- बारहवां भाव शनि, राहु या केतु से युक्त हो फिर अष्टमेश (कुंडली के आठवें भाव का स्वामी) से युक्त हो अथवा षष्ठेश (छठे भाव का स्वामी) से दृष्ट हो तो मरने के बाद अनेक नरक भोगने पड़ेंगे, ऐसा समझना चाहिए।
2- गुरु लग्न में हो, शुक्र सप्तम भाव में हो, कन्या राशि का चंद्रमा हो एवं धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो जातक मृत्यु के बाद परमपद प्राप्त करता है।
3- अष्टम भाव को गुरु, शुक्र और चंद्र, ये तीनों ग्रह देखते हों तो जातक मृत्यु के बाद श्रीकृष्ण के चरणों में स्थान प्राप्त करता है, ऐसा ज्योतिषियों का मत है।

Monday, May 5, 2014

गृह शांति हेतु कुछ सरल उपाय-

1)
अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है
कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है
तो कभी टिकेगा ही नहीं चाहे कुछ भी कर लें ! इससे बचने के लिए
wash basin में ही यह काम कर आया करें !
२)
जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर
छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से
नहीं मिलती ! बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते ! इनके आस पास काम करने वाले लोग इनसे जितना भी हो सके बात करने से भी बचते हैं !
अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं या खुद ही साफ़ कर लेते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप
सम्मान करते हैं !
3)
जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान
हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहू का सम्मान करते हैं ! जो लोग बाहर से
आने वाले लोगों को स्वच्छ पानी हमेशा पिलाते हैं उनके घर में
कभी भी राहू का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता !
४)
घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें
भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है ! जिस घर में
सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और
चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों से डटकर लड़ पाते हैं ! जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ जल्दी से नहीं
पकड़ पातीं !
५)
अगर आप नहाने के बाद bathroom में अपने कपडे़ इधर-उधर फैंक आते हैं या फिर पूरे bathroom में पानी बिखेर कर आ
जाते हैं तो आपका चन्द्रमा किसी भी स्तिथि में आपको अच्छे
फल नहीं देगा और हमेशा बुरा परिणाम देगा ! आपके शारीर से
सारा ओज निकाल देगा, personality बिल्कुल भी attractive नहीं रहेगी और आप हमेशा dull-dull से दिखेंगे ! इसीलिए पानी को हमेशा निथारना चाहिए !
६)
जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर
फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं ! इससे बचने
के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी ।
७)
उन लोगों का राहू और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी
अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ?
उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर
रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित
नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं ! इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर सही तरीके से लगायें और सब कुछ समेट दें !
८)
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय
अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें ! आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढेगी और क्रोध
धीरे-धीरे कम होने लगेगा ।
९)
ध्यान रखें, कभी भी खाली हाथ घर ना लौटें क्योंकि..
अधिकतर लोग शाॅप, ऑफिस या फैक्टरी से जब अपने घर
लौटते हैं तो अपनी व्यस्तता के कारण बिना कुछ लिए खाली हाथ
ही घर लौट आते हैं !
लेकिन आपने अक्सर हमारे घर के वृद्ध लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि कभी भी शाम को खाली हाथ घर नहीं लौटना चाहिए !क्योंकि हमारे शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि घर लौटते समय घर के बुज़ुर्गों या बच्चों के लिए कुछ न कुछ लेकर जाना चाहिए !
घर में कोई भी नई वस्तु आने पर बच्चे और बुजु़र्ग ही सबसे
ज्यादा खुश होते हैं !
कहीं-कहीं इस परम्परा में घर लौटते वक्त बच्चों के लिए मिठाई लाने के बारें में बताया गया है !बुजु़र्गों के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि बढ़ने लगती है और जिस घर में बच्चे और वृद्ध खुश रहते हैं, उस घर में लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है !
ऐसा माना जाता है कि रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरggे
उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं ! इसके विपरित घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है ! उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है ! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है !
ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर
में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है ।