Monday, July 21, 2014

केतु मूलत: उदासीनता का कारक है।

केतु प्रधान व्यक्ति- चेहरे पर हमेशा बारह बजे रहते हैं?
केतु मूलत: उदासीनता का कारक है। इसके प्रभाव से
व्यक्ति चैतन्यहीन बन जाता है।
इसकी महत्वाकांक्षाएँ सुप्त होती हैं।
हँसी कभी-कभी वह
भी मुश्किल से ही दिखाई
देगी। बातों में सदैव निराशा झलकेगी।
केतु वास्तव में संन्यास, त्याग, उपासना का भी कारक
है। केतु व्यक्ति को विरक्ति देता है। व्यय स्थान का केतु
मोक्षदायक माना जाता है। यदि कुंडली में केतु सूर्य के
साथ हो तो मन में आशंकाएँ
बनी रहती हैं, मंगल के साथ
हो तो काम टालने की प्रवृत्ति देता है, शुक्र युक्त
हो तो विवाह संबंधों में उदासीनता, गुरु के साथ
हो तो वैराग्य, स्वप्न सूचनाएँ देता है। बुध के साथ
वाणी दोष व चंद्र के साथ निराशा, अवसाद का कारक
बनता है।

Friday, July 11, 2014

लाल किताब के अनुसार कुंडली विश्लेषण कैसे करें?

लाल किताब के अनुसार कुंडली विश्लेषण कैसे करें? डाॅ. विजय कुमार शास्त्राी लाल किताब के अनुसार कुंडली विश्लेषण तो महत्त्वपूर्ण है साथ ही उसमें दोषों का निवारण कैसे करें यह भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं हैं। अंधे ग्रह- भाव 1 में यदि भाव 10 का शत्रु ग्रह बैठ जाए तो वह टेवा अंधे ग्रहों का देवा होता है। यदि शनि भाव 7 और सूर्य भाव 4 में हो तो अंधा टेवा माना जाएगा। बंद मुट्ठी ग्रह- यदि भाव 1,4,7 और 10 खाली हों अर्थात उनमें कोइ भी ग्रह न हो तो इस स्थिति का प्रभाव नाबालिग (ग्रहों का स्वभाव) बच्चों जैसा होता है। बालिग या बुद्धिमान, युवा पुरुष। विचारवान क्रियाशीलता के गुण उस कुंडली के ग्रहों में नहीं होते। उपाय- अंधे ग्रहों का दुष्प्रभाव दूर करने के लिए जातक दस अंधों को अपने हाथ से खाना खिलाए और शाम को कौवों को रोटी दे। उपाय- नाबालिग ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए जातक दूसरों से सहायता लेकर कार्य करे जैसे कोई बच्चा बड़ों या मित्रों से सहायता लेकर कार्य करता है। सोए हुए ग्रह- जिस घर में कोई ग्रह स्थित हो, उसके सामने वाले (7वें) घर में यदि कोई ग्रह न हो तो वह सोया हुआ ग्रह माना जाएगा। यहां उच्चस्थ ग्रह भी अपना श्रेष्ठ फल जातक को नहीं देगा। जैसे यदि भाव 4 में गुरु हो और भाव 10 खाली हो तो यहां उच्चस्थ गुरु का श्रेष्ठ फल जातक को नहीं मिलेगा। यदि भाव 7 खाली हो तो भाव 1 में बैठा शुभ ग्रह कोई फल नहीं देगा। यहां सामने वाले ग्रह के मित्र ग्रह को स्थापित करें। यदि कुंडली का भाव
10 खाली है तो भी कुंडली सोए हुए ग्रहों की मानी जाएगी। यदि काम का फल जातक को कम मिलता हो तो ऐसी स्थिति में (वर्ष फल के अनुसार) प्रति वर्ष उस घर को जगाने के लिए भाव 4 और भाव 2 के मित्र ग्रह की स्थापना 10वें घर में आवश्यक हो जाती है। फलादेश करने का ढंग- लाल किताब के अनुसार केवल एक ग्रह को देखकर फलादेश कर देना उचित नहीं है यह देखना आवश्यक है कि दृष्टि से कौन-कौन से ग्रह आपस में मिल रहे हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि अकेले-अकेले ग्रह किसी विशेष घर में अच्छा प्रभाव नहीं देते अपितु इकट्ठे अच्छा प्रभाव दे जाते हैं। जैसे भाव 8 में अकेला मंगल या बुध अच्छा फल नहीं देता परंतु दोनों मिल कर जातक को अच्छा प्रभाव देंगे लेकिन उसके ननिहाल का बेड़ा गर्क कर देंगे। यदि दोनों ग्रह मित्र हों तो बहुत अच्छा प्रभाव नहीं देते और यदि परस्पर शत्रु भाव रखते हों और एक स्थान (घर) दृष्टि से या वैसे ही इकट्ठे बैठे हों तो निश्चित रूप से हानि करते हैं। यदि कुंडली में वर्ष फल के अनुसार कोई शत्रु भी उनके घर में आ बैठे तो वह पहले बैठे दो ग्रहों के प्रभाव को दूषित कर देता है। मान लें कि किसी जातक का राहु भाव 3 में आ गया है। 11वां भाव शनि और बृहस्पति का भाव है। राहु ने वहां आकर बृहस्पति के प्रभाव को नष्ट कर दिया है। शनि का उसने कुछ नहीं बिगाड़ा, क्योंकि शनि का वह एजेंट है। अब राहु के भाव 11 का उपाय बृहस्पति को उच्च करना लिखा है। इस प्रकार अन्य घरों में देखें कि यह घर किस-किस ग्रह का घर है और वे ग्रह किस स्थिति में बैठे हैं। उन्हें उच्च करें। जैसे भाव 1 कुंडली में सूर्य और मंगल का है। इस घर में इन दोनों का शत्रु आ बैठे तो लाल किताब के अनुसार सूर्य व मंगल को उच्च करने का प्रयत्न करें। इसी प्रकार अन्य घरों में भी उचित उपाय करें। उदाहरणस्वरूप एक जन्म कुंडली प्रस्तुत है। अब भाव 1 में, जो कि सूर्य और मंगल का पक्का घर है, राहु आ कर बैठ गया है। अब भाव 7 में 6 ग्रह इकट्ठे बैठ गए हैं। राहु की भी दृष्टि पड़ रही है। इस प्रकार सात ग्रह भाव 7 में विद्यमान माने गए और भाव 7 का ग्रह शुक्र भाव 8 में नीच स्थान पर आ बैठा है। इस जातक का राजदरबार और गृहस्थ जीवन दोनों ही उलझन में रहते हैं। यहां राहु के दुष्प्रभाव से मुक्ति के लिए सिक्का या नारियल जल में प्रवाहित करें तथा शुक्र के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए काली गाय की सेवा करें और दही का सेवन न करें बल्कि स्नान करें। यहां बृहस्पति, मंगल और सूर्य तीनों ही शुक्र के शत्रु हैं। इन्हें वहां से हटाकर धर्म स्थान में पहुंचाएं और केतु को भाव 12 में स्थापित कर दें। अब भाव 7 में केवल शनि और बुध दो ग्रह शेष रह गए। दोनों शुक्र के मित्र हैं। यदि जातक मांस, शराब और पर स्त्री से दूर रहे तो वह धनाढ्य होगा। यहां बुध और शनि भाव 7 में रह गए और चंद 10 में है इसलिए शनि का ऋण भी उतारें। वर्षफल में ग्रह का प्रभाव कब होगा जन्म कुंडली के खाली घरों में जब वर्ष फल के अनुसार कोई आ जाए तो उसका अच्छा या बुरा प्रभाव जातक के जन्म मास से आठवें महीने में पड़ेगा (जन्म कुंडली में ये दोनों घर खाली हैं)। मान लें कि किसी जातक की जन्म कुण्डली में सूर्य 11वें भाव में है और उसका 52वां वर्ष चल रहा है। 52 को 11 से भाग दें तो 8 शेष बचता है। अतः 52वें वर्ष में सूर्य आठवें घर में गिना जाएगा। वह माह जातक के जन्म का महीना गिना जाएगा। जैसा कि ऊपर बताया गया है, किसी ग्रह की स्थिति की जानकारी जिस भाव में वह स्थित हो उसकी संख्या से जातक के आयु वर्ष को भाग देकर प्राप्त की जा सकती है। यह साधारण वर्ष फल है। इसके बाद यदि हर माह भविष्य जानना चाहें तो सूर्य के चलावें। जीवन भर मुख्य प्रभाव डालने वाले भाव भाव 1, 7, 8 और 11- भाव 1 राजा यह देखना आवश्यक है कि दृष्टि से कौन-कौन से ग्रह आपस में मिल रहे हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि अकेले-अकेले ग्रह किसी विशेष घर में अच्छा प्रभाव नहीं देते अपितु इकट्ठे अच्छा प्रभाव दे जाते हैं। जैसे भाव 8 में अकेला मंगल या बुध अच्छा फल नहीं देता परंतु दोनों मिल कर जातक को अच्छा प्रभाव देंगे लेकिन उसके ननिहाल का बेड़ा गर्क कर देंगे। । आवरण कथा ।। । और 7 मंत्री माना गया है। यदि इन घरों में आपस में शत्रु ग्रह स्थित हों तो जातक का जीवन कष्टों, झगड़ों में बीतता है। इसी प्रकार भाव 8 और 11 में भी यदि परस्पर शत्रु ग्रह स्थिति हांे तो 11वां भाव 8वें भाव के माध्यम से भाव 2 को खराब कर देता है। भाव 2 धन का घर है। फलस्वरूप जातक को आर्थिक संकट घेर लेता है। भाव 2 व 12, 6 व 8- ऊपर वर्णित भाव 2 व 12 के ग्रह परस्पर मैत्री भाव रखते हैं जब कि भाव 6 व 8 शत्रु भाव। कई बार भाव 8 व 12 के ग्रह भी आपस में मिलकर जातक के जीवन को कष्ट में डाल देते हैं। भाव 3=भाई, भाव 11=आमदनी, भाव 5=संतान और शिक्षा, भाव 9=भाग्य, पूर्वज विवरण, भाव 10=कर्म क्षेत्र, राजदरबार। इन पांचो घरों का आपस में गहरा संबंध है। मनुष्य जीवन की यही कुछ बातें महत्वपूर्ण होती हैं। वह चाहता है कि उसके भाई बहन हों, उसकी अपनी संतान हो, अच्छी आमदनी व कारोबार हो और वह भाग्यवान हो। यदि भावों में परस्पर मैत्री भाव रखने वाले ग्रह स्थित हों तो जातक का जीवन सुखमय और यदि शत्रुता भाव रखने वाले हों तो दुखमय होता है। भाव 3 भाव 11 को और भाव 5, 9 को देखता है। यदि भाव 5 में पापी ग्रह स्थित हो तो जातक को संतान जन्म के बाद कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं होता। इसी प्रकार जब भाव 5 में कोई पापी ग्रह हो और भाव 8 में उस का शत्रु ग्रह हो तो भाव 11 बिजली की तरह असर करता है और भाव 8 में बैठे ग्रह पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। भाव 5 और 10- इन दोनों घरों के ग्रह आपस में शत्रुतापूर्ण व्यवहार करते हैं। चाहे आपस में मित्र ही क्यों न हांे। जैसे किसी जातक के भाव 10 में चंद्र और भाव 5 में मंगल है। ये दोनों ग्रह आपस में मित्र हैं। परंतु जातक के 24वंे वर्ष में उसकी माता या शिक्षा पर नीच प्रभाव पड़ेगा और 28वें वर्ष में उसके भाई पर कोई अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा। भाव 2 व 9, 10- यदि कुंडली में भाव 2 खाली हो तो भाव 9 का विशेष प्रभाव जातक पर नहीं पड़ता है। उसके पास केवल दिखावे का ही धन होता है। दोनों घरों के खाली होने पर जातक कठिन परिश्रम से ही जीवन निर्वाह करेगा। इसी प्रकार भाव 2 और भाव 10 परस्पर संबंधित हैं, क्योंकि भाव 2 धन और 10 कर्म का घर है। इन दोनों घरों के खाली होने पर जातक का जीवन व्यर्थ होता है। यदि भाव 2 में कोई ग्रह हो तथा 10 खाली हो तो यह सोए ग्रह की कुंडली होती है। उपाय के लिए दस अंधों को अपने हाथ से खाना खिलाएं। यदि भाव 2 खाली हो तो भाव 10 के मित्र ग्रहों की चीजें धर्म स्थल में देते रहें। इसी प्रकार भाव 10 खाली हो तो भाव-चार के ग्रह सोए रहते है। इन्हें जगाने के लिए भाव 10 (पिता का घर, पिता, सरकारी कार्यालय) में भाव 4 के मित्र ग्रह की चीजें स्थापित करें। दो ग्रहों का एक ही घर- भाव 1 सूर्य और मंगल का घर है। यह मंगल की राशि और सूर्य का पक्का घर है। भाव 2 शुक्र और बृहस्पति का, भाव 3 मंगल और बुध का, भाव 5 बृहस्पति और सूर्य का, भाव 6 बुध और केतु का, भाव 7 शुक्र और बुध का, भाव 8 मंगल और शनि का, भाव 11 बृहस्पति और शनि का तथा भाव 12 बृहस्पति और राहु का घर है। जब इन घरों में से एक ग्रह का शत्रु आ बैठे तब जिस ग्रह की वह हानि कर रहा हो उसका उपाय अवश्य करें। मान लें कि भाव 2 में बुध है। बुध बृहस्पति का शत्रु किंतु शुक्र का मित्र भी है। अतः बृहस्पति का उपाय करें । इसी प्रकार भाव 11 में राहु बैठा हो तो भी बृहस्पति का ही उपाय करना चाहिए। क्योंकि राहु शत्रु भाव के कारण बृहस्पति की हानि कर रहा है। इसी आधार पर अन्य घरों के ग्रहों का उपाय करना चाहिए

Thursday, July 10, 2014

पीड़ा निवारण के लिए वानस्पतिक उपाय (Planets remedy by roots of plants)

यदि आप चिड़चिड़ापन, ज्वर, मान-सम्मान में कमी, राज्य की ओर से विरोध, झूठे आरोपों से पीडित हैं, तो जातक का सूर्य ग्रह खराब चल रहा है। ऐसे में जातक रविवार को बिल्वपत्र की जड़ लाल कपड़े में प्रात: दाहिने हाथ में बांधे तो सूर्य के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
साथ ही ओम हां हीं हौं स: सूर्याय नम: का जाप लाभ देता है।
मानसिक असंतोष, नींद में स्त्री और जल से भय आदि स्वप्न, जल से होने वाले पेट संबंधित रोग, मातृप्रेम में कमी हो तो ऐसा जातक चंद्र ग्रह से पीडित होगा। इन्हें खिरनी की जड़ को सफेद कपड़े में बांधकर किसी भी पूर्णमाशी को सायंकाल गले में धारण करना चाहिए। ऐसे जातकों को ओम श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम: का जाप करना चाहिए।
किसी काम में लगातार विफलता, ज्वर और रक्तविकार होना, रक्तदोष के कारण बीमारी होना, क्रोध की अधिकता हो तो ऐसे जातक मंगल ग्रह से पीडित होते हैं। इन्हें अनंतमूल की जड़ लाल वस्त्र में बांध कर लाभ के चौघडिए में गले में धारण करनी चाहिए। साथ ही ओम क्रां क्रीं कौं स: भौमाय नम: का जाप भी करना श्रेष्ठ होता है।
शरीर में फोड़े-फुंसियों का होना, समय पर मित्रों का साथ छूटना, कार्यों में लगातार विघ्न आना, पित्त से संबंधित रोग जैसी समस्याएं हों तो ऐसे जातक का बुध कमजोर होता है। इन्हें विधारा की जड़ शुभ के चौघडिए में धारण करनी चाहिए। ओम ब्रां ब्रीं ब्रौ स: बुधाय नम: का जाप भी करें।
मान-सम्मान की हानि, रोजगार से संबंधित परेशानी, विवाह में देरी, पेट में पीड़ा और व्यर्थ की लंबी यात्राएं होती हों तो जातक का बृहस्पति ठीक नहीं है। ऐसे जातक को केले की जड़ या हल्दी की गांठ पीले वस्त्र में अमृत के चौघडिए में गले में धारण करनी चाहिए। ओम ग्रां ग्रीं ग्रौ स: गुरुवे नम: मंत्र जाप लाभ देता है।
स्त्री सुख में कमी, स्त्री का रोगी होना, गुप्त रोगों का बढऩा, विवाह में बाधा आ रही हो तो जातक का सूर्य कमजोर माना जाता है। ऐसे में सरपोंखा की जड़ सूर्योदय काल में गले में धारण करनी चाहिए। ओम द्रां द्रीं द्रौ स: शुक्राय नम: का भी करें।
शरीर का निस्तेज होना, पारिवारिक क्लेश होना, धन का नाश, काम में विफलता, शोक से ग्रसित होना, दरिद्र्रता, व्यापार में घाटा शनि की नाराजगी दिखाता है। ऐसे जातक बिच्छू बूटी की जड़ काले धागे में अभिजीत मुहूर्त में गले में धारण करें और ओम प्रां प्रीं प्रौ स: शनये नम: का जाप करें।
पाप कर्मों में वृद्धि, चर्म रोगों का होना, धूम्रपान की प्रवृति बढऩा, शेयर आदि में नुक्सान होना, रात्रि में बुरे स्वप्न का आना, घर में बार-बार चोरियां होना जैसे लक्षण बार-बार दिखते हों तो जातक राहू और केतू दोनों ग्रहों से पीडित है। इन्हें सफेद चंदन नीले वस्त्र में मध्य रात्रि को गले में धारण करना चाहिए। साथ ही ओम भ्रां भ्रीं भौं स: राहुवे नम: और ओम स्रां स्री स्रौं स: केतवे नम: के जाप भी करने चाहिएं।
सम्बन्धित ग्रहों की जड़ों को शुभ चंद्रमा में धारण करने से पहले कंडे पर गुग्गुल की धूप देकर अभिमंत्रित करें। साथ ही सम्बन्धित वार को वैसा ही भोजन व खाद्य वस्तुएं दान करें, जैसे रविवार को गेहूं से बनी चीजें, सोम को दही मिश्री, मंगल को गुड़, बुध को मूंग, वीरवार को केले व चने की दाल, शुक्र को खीर, उड़द व अन्य कोई सफेद चीज, शनि को तिल व तिल की वस्तुएं आदि।

Saturday, July 5, 2014

अपामार्ग

शहरों के बाग-बगीचों के बाहर और खुली जगह में पैदा होने वाले पौधों में एक पौधा होता है अपामार्ग का, जिसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा भी कहते हैं।

कुछ व्याधियों में इस पौधे का उपयोग बहुत लाभप्रद सिद्ध होता है। हमारे बुजुर्ग लोग इस पौधे को भली-भाँति जानते-पहचानते हैं।

विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- अपामार्ग। हिन्दी- चिरचिटा, लटजीरा, आंधीझाड़ा। मराठी- अधाड़ा। गुजराती- अघेड़ो। बंगाली- अपांग। तेलुगू- दुच्चीणिके। कन्नड़- उत्तरेन। तमिल- नाजुरिवि। मलयालम- कटलती। फारसी- खारेवाजूं। इंग्लिश- रफ चेफ ट्री। लैटिन- एचिरेंथस एसपेरा।

रासायनिक संघटन : अपामार्ग की राख में 13 प्रतिशत चूना 4 प्रतिशत, लोहा 30 प्रतिशत, क्षर 7 प्रतिशत, शोराक्षार 2 प्रतिशत, नमक 2 प्रतिशत गन्धक और 3 प्रतिशत मज्जा तन्तुओं के उपयुक्त क्षार रहते हैं। इसके पत्तों की राख की अपेक्षा इसकी जड़ की राख में ये तत्व अधिक पाए जाते हैं।

गुण : अपामार्ग दस्तावर, तीक्ष्ण, अग्नि प्रदीप्त करने वाला, कड़वा, चरपरा, पाचक, रुचिकारक और वमन, कफ, मेद, वात, हृदय रोग, अफारा, बवासीर, खुजली, शूल, उदर रोग तथा अपची को नष्ट करने वाला है। यह उष्णवीर्य होता है।

परिचय : यह पौधा एक से तीन फुट ऊंचा होता है और भारत में सब जगह घास के साथ अन्य पौधों की तरह पैदा होता है। खेतों की बागड़ के पास, रास्तों के किनारे, झाड़ियों में इसे सरलता से पाया जा सकता है।

यह वर्षा ऋतु में पैदा होता है। इसमें शीतकाल में फल व फूल लगते हैं और ग्रीष्मकाल में फल पककर गिर जाते हैं। इसके पत्ते अण्डकार, एक से पाँच इंच तक लंबे और रोम वाले होते हैं। यह सफेद और लाल दो प्रकार का होता है। सफेद अपामार्ग के डण्ठल व पत्ते हरे व भूरे सफेद रंग के होते हैं। इस पर जौ के समान लंबे बीज लगते हैं। लाल अपामार्ग के डण्ठल लाल रंग के होते हैं और पत्तों पर भी लाल रंग के छींटे होते हैं। इसकी पुष्पमंजरी 10-12 इंच लंबी होती है, जिसमें विशेषतः पोटाश पाया जाता है।

उपयोग : अलग-अलग हेतु से इसकी जड़, बीज, पत्ते और पूरा पौधा (पंचाग) ही प्रयोग में लिया जाता है। 'अपामार्ग क्षार तेल' इसी से बनाया जाता है। यह जड़ी इतनी उपयोगी है कि आयुर्वेद और अथर्ववेद में इसकी प्रशंसा करते हुए इसे दिव्य औषधि बताया गया है।

इसे अत्यंत भूख लगने (भस्मक रोग), अधिक प्यास लगने, इन्द्रियों की निर्बलता और सन्तानहीनता को दूर करने वाला बताया है। इस पौधे से सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जन्तु के काटे हुए को ठीक किया जा सकता है।

इण्डियन मेटेरिया मेडिका के लेखक डॉ. नाडकर्णी के अनुसार अपामार्ग का काढ़ा उत्तम मूत्रल होता है। इसके पत्तों का रस उदर शूल और आँतों के विकार नष्ट करने में उपयोगी होता है। इसके ताजे पत्तों को काली मिर्च, लहसुन और गुड़ के साथ पीसकर गोलियां बनाकर सेवन करने से काला बुखार ठीक होता है।

अपामार्ग कड़वा, कसैला, तीक्ष्ण, दीपन, अम्लता (एसिडिटी) नष्ट करने वाला, रक्तवर्द्धक, पथरी को गलाने वाला, मूत्रल, मूत्र की अम्लता को नष्ट करने वाला, पसीना लाने वाला, कफ नाशक और पित्त सारक अदि गुणों से युक्त पाया गया है। शरीर के अन्दर इसकी क्रिया बहुत शीघ्रता से होती है और दूसरी दवाओं वाले नुस्खों के साथ इसका उपयोग करने पर यह बहुत अच्छा काम करता है।

Thursday, July 3, 2014

दो ग्रहों की युती के फल

जानीये दो ग्रहों की युती के फल :-
१. सूर्य+बुध = विद्या , बुद्धि देता है, सरकारी नौकरी, ज्योतिष , अपने प्रयास से धनवान , बचपन में कष्ट. 
२. सूर्य+शुक्र =कला, साहित्य, यांत्रिक कला का ज्ञान , क्रोध, प्रेम सम्बन्ध , बुरे, गृहस्थ बुरा , संतान में देरी , तपेदिक , पिता के लिए अशुभ। 
३. सूर्य+गुरू =मान-मर्यादा , श्रेष्टता , उच्च पद तथा यश में वृद्धि करता है, स्वयं की मेहनत से सफलता। 
४. सूर्य+ मंगल =साहसी , अग्नि से सम्बंधित कामों में सफलता , सर्जन , डॉक्टर , अधिकारी , सर में चोट, का निशान , दुर्घटना , खुद का मकान बनाये। 
५. सूर्य+चन्द्र =राजकीय ठाठ - बाठ , अधिकार, पद, उत्तम राजयोग , डॉक्टर , दो विवाह , गृहस्थ जीवन हल्का , स्त्रीयों द्वारा विरोध, बुढ़ापा उत्तम। 
६. सूर्य+शनि =पिता-पुत्र में बिगाड़ अथवा जुदाई। युवावस्था में संकट, राज दरबार बुरा। स्वास्थ कमजोर। पिता की मृत्यु , गरीबी। घरेलू अशांति। पत्नी का स्वास्थ कमजोर। 
७. सूर्य+राहू =सरकारी नौकरी में परेशानी। चमड़ी पर दाग , खर्च हो। घरेलू अशांति , परिवार की बदनामी का डर। श्वसुर की धन की स्थिति कमजोर। सूर्य को ग्रहण। 
८. सूर्य+केतू=सरकारी काम अथवा सरकारी नौकरी में उतार-चढ़ाव। संतान का फल बुरा। 
९. चन्द्रमा+मंगल=मन की स्थिति डांवाडोल। दुर्घटना। साहसिक कामों से धन लाभ। उत्तम धन।
१०. चन्द्र+बुध=उत्तम वक्ता। बुद्धिमत्ता। लेखन शक्ति। गहन चिंतन। स्वास्थ में गड़बड़। दो विवाह योग। मानसिक असंतुलन।
११. चन्द्र+गुरू= उत्तम स्थिति। धन प्राप्ति। बैंक में अधिकारी। उच्च पद। मान-सम्मान। धनी। यदि पाप दृष्टी हो तो विद्द्या में रूकावट।
१२. चन्द्र+शुक्र=दो विवाह योग। अन्य स्त्री से सम्बन्ध। विलासी। शान-शौकत का प्रेमी। रात का सुख।
१३. चन्द्र+शनि = दुःख। मानसिक तनाव। नज़र की खराबी। माता तथा धन के लिए ठीक नहीं। हर काम में रूकावट। गरीबी। शराबी। उदास ,सन्यासी। स्त्री सुख में कमी।
१४. चन्द्र+राहू = पानी से डर। शरीर पर दाग। विदेश यात्रा। जिस भाव में स्थित हो उसकी हानी।
१५. चन्द्र+केतू=विद्या में रूकावट। मूत्र वीकार। जोड़ों में दर्द। केमिष्ट।
१६ मंगल+शनि = दुर्घटना। इंजीनियर। डॉक्टर। भाइयों से अनबन। धन संग्रह में रूकावट। चमड़ी तथा खून में वीकार। साहसिक कार्यों में सफलता। धन-दौलत चोरी। डाकू। ड्राइवर। सरकारी अधिकारी।
१७. मंगल+बुध=साहसिक कार्यो से लाभ। बुद्धी और साहस का योग। खोजी निगाह। स्पष्ट वक्ता। इंजीनियर। डाक्टर। दुर्घटना आदि।
१८. मंगल+गुरू=गणितज्ञ , विद्वान , ज्योतिषी, खगोल शास्त्री , पीलिया, धनवान , अगुआ, तथा नेता।
१९. मंगल+शुक्र=व्यापार में कुशल। धातु शोधक। विमान चालक। साहसी। अंतराष्ट्रीय व्यापार। ऑटोमोबाइल। कार। फर्नीचर। पत्नी का स्वास्थ कमजोर।
२०. मंगल+राहू =कम बोले। उत्साही। चुस्त। फसादी। दिमाग तेज। शाही सवारी। अधिकारी। रसोई में होशियार।
२१. मंगल+केतू=संतान का फल शुभ। पुत्र साहसी। तपेदिक। चमड़ी तथा पैरों में रोग। जोड़ों का सूजन। आत्महत्या आदि। 
२२. बुध+गुरू= विद्वान। कवि। काव्य रचियता। माता-पिता दुखिया। कभी अमीर , कभी गरीब। अकाउंटेंट। बैंक में अधिकारी। एजेंट। वकील।
२३. बुध+शुक्र = अर्द्ध सरकारी नौकरी। सरकारी नौकरी। घरेलू सुख। कला कौशल। शिल्प कला। तेल। मिट्टी। प्रेम सम्बन्ध खराब। मशीनरी। नीलामी करने वाला। क्लर्क।
२४. बुध+शनि=कम बोलने वाला। गंभीर स्वभाव। बीमा व्यवसाय। शराबी। स्त्रीयों का मिलनसार। पिता के लिए बुरा।
२५. बुध+राहू= पागल खाना। जेल। हस्पताल। जानवरों का शिकारी। दिमाग में विकार। मानसिक तनाव। शिकारी।
२६. बुध+केतू =यात्रा लगी रहे। कमर, पेशाब, एवं रीढ़ की हड्डी में वीकार तथा दुःखी। पैरों में विकार। अन्वेषक। जादू टोना। 
२७. गुरू + शुक्र=सुखी। बलवान। चतुर. नीतिवान। पत्नी या पिता एक सहायक। घरेलू अशांति। अध्यापिका।
२८. गुरू + शनि= कार्यों में निपुण। धनी। तेजस्वी। विद्या में रूकावट। पत्नी तथा पिता के लिये अशुभ। बीमारी। चिंतन शक्ति उत्तम।
२९. गुरू +राहू= विद्या में रूकावट। पिता के लिये खराब।
३०. गुरू + केतू =विद्या के लिये उत्तम , शत्रु परेशान करे। पिता -पुत्र में अनबन। अन्वेषक।
३१. शनि+राहू =शरीर पर काला दाग। तिल। पत्नी से सम्बन्ध खराब। घरेलू अशांति। डॉक्टर।
३२. शुक्र+राहू=दो विवाह योग। घरेलू अशांति। प्रेम सम्बन्ध। बिजली विभाग में नौकरी। सेना में नौकरी। पत्नी से अनबन।
३३. शुक्र+केतू =संतान के लिये बुरा। कामी। प्रेम सम्बन्ध। भीतर-ही भीतर गम तथा भय। मूत्र वीकार , शुक्राणु वीकार। 

तीन ग्रहों की युति के फल

तीन ग्रहों की युति के फल :-
१. सूर्य+चन्द्र+बुध=माता-पिता के लिये अशुभ। मनोवैज्ञानिक। सरकारी अधिकारी। ब्लैक मेलर । अशांत। मानसिक तनाव। परिवर्तनशील। 
२. सूर्य+चन्द्र +केतू=रोज़गार के लिये परेशान। न दिन को चैन न रात को चैन। बुद्धि काम ना दे, चाहे लखपति भी हो जाये। शक्तिहीन। 
३. सूर्य+शुक्र+शनि =पति/पत्नी में विछोह। तलाक हो। घर में अशांति। सरकारी नौकरी में गड-बड़। 
४. सूर्य+बुध+राहू =सरकारी नौकरी। अधिकारी। नौकरी में गड-बड़। दो विवाह का योग। संतान के लिये हल्का। जीवन में अन्धकार। केमिष्ट।
५. चन्द्र+शुक्र+बुध =सरकारी अधिकारी। कर्मचारी। घरेलू अशांति। बहू -सास का झगड़ा। व्यापार के लिये बुरा। लड़कियाँ अधिक। संतान में विघ्न। 
६. चन्द्र +मंगल+बुध=मन, साहस , बुद्धि का सामंजस्य। स्वास्थ अच्छा। नीतिवान साहसी ,सोच-विचार से काम करे। पाप दृष्टी में होतो, डरपोक /. दुर्घटना /ख्याली पुलाव पकाए। 
७. चन्द्र+मंगल+शनि= नज़र कमजोर। बीमारी का भय। डॉक्टर , वै ज्ञानिक , इंजीनियर , मानसिक तनाव। ब्लड प्रेशर कम या अधिक।
८. चन्द्र+मंगल+राहू =पिता के लिए अशुभ। चंचलता। माता तथा भाई के लिए हल्का।
९. चन्द्र+बुध +शनि=तंतु प्रणाली में रोग। बेहोश हो जाना। बुद्धि की खराबी से अनेक दुःख हो। अशांत, मानसिक तनाव। बहमी।
१० चन्द्र +बुध+राहू =माँ के लिए अशुभ। सुख हल्का। पिता पर भारी। दुर्घटना की आशंका। 

११. चन्द्र+शनि+राहू=माता का सुख काम। दिमागी परेशानियाँ। ब्लड प्रेशर। दुर्घटना का भय। स्वास्थ हल्का।
१२. शुक्र+बुध+शनि =चोरियां हो। धन हानी। प्रॉपर्टी डीलर। जायदाद वाला। पत्नी घर की मुखिया।
१३. मंगल+बुध+शनि = आँखों में विकार। तंतु प्रणाली में विकार। रक्त में विकार। मामों के लिये अशुभ। दुर्घटना का भय।
१४. मंगल+बुध+गुरू=अपने कुल का राजा हो। विद्वान। शायर। गाने का शौक। ओरत अच्छी मिले।
१५. मंगल+बुध +शुक्र=धनवान हो। चंचल स्वभाव। हमेशा खुश रहे। क्रूर हो।
१६. मंगल+बुध+राहू=बुरा हो। कंजूस। लालची। रोगी। फ़कीर। बुरा काम करे।
१७. मंगल+बुध+केतू= बहुत अशुभ। रोगी हो। कंजूस हो। दरिद्र। गंदा रहे। व्यर्थ के काम करे।

१८. गुरू+सूर्य+बुध=पिता के लिए अशुभ। विद्या विभाग में नौकरी।
१९. गुरू+चन्द्र+शुक्र=दो विवाह। रोग। बदनाम प्रेमी। कभी धनी , कभी गरीब।
२०. गुरू+चन्द्र+मंगल=हर प्रकार से उत्तम। धनी। उच्च पद। अधिकारी। गृहस्थ सुख।
२१. गुरू+चन्द्र+बुध= धनी। अध्यापक। दलाल। पिता के लिये अशुभ। माता बीमार रहे।
२२. गुरू+शुक्र+मंगल=संतान की और से परेशानी। प्रेम संबंधों से दुःख। गृहस्थ में असुख।
२३. गुरू+शुक्र+बुध=कुटुंब अथवा गृहस्थ सुख बुरा। पिता के लिये अशुभ। व्यापारी।
२४. गुरू+शुक्र+शनि= फसादी। पिता-पुत्र में तकरार।
२५. गुरू+मंगल+बुध=संतान कमजोर। बैंक एजेंट। धनी। वकील।
२६. चन्द्र+शुक्र+बुध+शनि=माँ- पत्नी में अंतर ना समझे।
२७. चन्द्र+शुक्र+बुध+सूर्य=आज्ञाकारी। अच्छे काम करे। माँ -बाप के लिये शुभ। भला आदमी। सरकारी नौकरी विलम्ब से मिले।

Wednesday, July 2, 2014

Disadvantaged, poor get 25% quota under RTE Act

BANGALORE: With weeks left for the schools to reopen, the Karnataka government on Tuesday brought clarity to the 25% quota for the underprivileged in the Right to Education Act (RTE), issuing a notification on how the pie is divided among the weaker sections who could get admission in unaided schools.

The 25% RTE quota is split between disadvantaged groups and the economically weaker section (EWS). The former consists of 11 groups - SC, ST, Category 1, 2 (a), 2 (b), 3 (a), 3 (b), orphans , street children, children with special needs and HIV-infected . Those seeking seats under Category 2 (a), 2 (b), 3 (a) and 3 (b) should have an annual family income of less than Rs 3.5 lakh.

Children from families whose annual income is below Rs 3.5 lakh - the threshold for the creamy layer of backward class as notified by the social welfare department - will be considered under EWS. Those seeking seats under EWS should not come under any of the other 11 disadvantaged groups.

RTE are we ready?

SCs get lion's share in 25% RTE quota

BANGALORE: The Karnataka government on Tuesday announced the split-up of the 25% quota under RighttoEducation Act (RTE).

Of the 25% seats , SCs will get 7.5% and STs 1.5%. The remaining 16 % will be shared by the other nine disadvantaged groups and the EWS . The schools can decide on them through lots. For example , if there are 11 students belonging to this 16 % for 10 vacancies , the lot system could be utilized.

The first seven categories will be determined by the notification of the social welfare department .The rest of them will be based on the notification of the department concerned like labour department .

The governmentwill reimburse Rs 11,848 for a student joining Class 1. The amount will be half as much for a preschool kid. If the quota for SCs is not filled, it can be made available for STs and vice-versa within the neighbourhood . If the 16 % is not filled, it's available for the SC /ST and vice-versa . If the quota is not filled from within the neighbourhood , it should be extended .

It has not yet decided on what to do with the seats if they still remain vacant . The procedures on how to go about the implementation will be notified on Wednesday .