Tuesday, June 24, 2014

जानिये अपने रोजगार के अवसर :-

जानिये अपने रोजगार के अवसर :-
यदि १, , , १०, ११ वे भावों में निम्न ग्रहों की युति हो तो , जातक किस कार्य में सफल होगा :-
१.       सूर्य+मंगल -डाक्टर, सर्जन , सेना , पुलिस।
२.       सूर्य+बुध -सरकारी /अर्द्ध सरकारी /निजी सेवा आवश्यक।
३.       सूर्य+मंगल +बुध -डाक्टर/वैद्य / नर्स। 
४.       सूर्य+बुध+शुक्र-मैटनरी/दांतों का डाक्टर /मैकेनिक /टाइपिस्ट। 
५.       सूर्य+मंगल+केतू-होमिओ डाक्टर / भट्टा मालिक। 
६.       यदि १० वे भाव में उच्च राशी का मंगल (१०) का होतो -डाक्टर , सेना, या पुलिस में उच्च पद 
७.       मंगल +बुध+गुरू-प्रिंटर, पब्लिशर. 
८.       गुरु अथवा शनि+मंगल+बुध- स्टेनोग्राफर , टाइपिस्ट। 
९.       मंगल+बुध+गुरू - पोस्ट एवं टेलीग्राम, सिंगल। 
१०.   गुरू+शुक्र+मंगल - टेलीफोन विभाग , वायरलेस। 
११.   मंगल+बुध - टेक्नीकल विभाग , कारखाना। 
१२.   मंगल+बुध+गुरू - एजेंट, वकील। 
१३.   मंगल+बुध +शुक्र - रेलवे, ट्रांसपोर्ट विभाग। 
१४.   मंगल+गुरू+सूर्य - वित्त विभाग, लेखा अधिकारी।
१५.   मंगल+सूर्य - स्वास्थ, मेडिकल विभाग,डाक्टर। 
१६.   मंगल+बुध+शनि - लोहा तथा अन्य धातु उद्योग , डाक्टर। 
१७.   मंगल+गुरु +सूर्य - कानून विभाग, प्रोफ़ेसर। 
१८.   मंगल+शुक्र - टेलरिंग , कढ़ाई , छपाई। 
१९.   मंगल+गुरु+शुक्र+सूर्य - जज, अधिकारी , प्रबंधक। 
२०.   मंगल+शनि - इंजीनियर, डाक्टर , ड्राइवर , चोर, डाकू आदि। 
२१.   गुरू+बुध - बैंक , सलाहकार, पुस्तक विक्रेता। 
२२.   गुरू +बुध+राहू - जेल विभाग, हस्पताल . 
२३.   गुरू+बुध+शुक्र - रेडिओ विभाग , व्यापारी। 
२४.   गुरू+शुक्र+सूर्य - अध्यापक , लैक्चरार। 
२५.   बुध अकेला - व्यापार , उद्योग। 
२६.   गुरू+बुध + शुक्र - लोक संपर्क, सूचना विभाग। 
२७.   शुक्र+बुध - अर्द्ध सरकारी सेवा विभाग। 

२८.   बुध+गुरू - वकील, मैनेजर आदि।

धनवान बनने के कुछ योग

१.      आज के भौतिक युग में हर जातक धनवान बनना चाहिये , कुछ योग नीचे दिये रहे है :- 
१. यदि मेष राशी में - शनि , शुक्र हो। 
२. वृषभ राशी में - गुरू , शुक्र हो। 
३. मिथुन राशी में - चन्द्र, मंगल हो। 
४. कर्क राशी में - शुक्र , राहू हो। 
५. सिंह राशी में - बुध हो। 
६. कन्या राशी में - शुक्र, चन्द्र हो। 
७. तुला राशी में - शुक्र , राहू। 
८. वृश्चिक राशी में - बुध. , गुरू। 
९. धनु राशी में - शनि , शुक्र। 
१०. मकर राशी में - मंगल, शनि। 
११. कुम्भ राशी में - गुरू। 
१२. मीन राशी में - मंगल, शनि। 
दी गई तालिका में दी गई राशी में ग्रह होंगे तो जातक अवश्य ही उत्तम धन पायेगा। यदि दी गयी राशी में दो ग्रहों में से एक ग्रह भी होगा तो मध्यम धन लाभ होगा। यदि दी गयी राशी में एक भी ग्रह न होतो, धनवान बनने की लालसा बेकार है।

दो ग्रहों की युती के फल

जानीये दो ग्रहों की युती के फल :-
१.       सूर्य+बुध = विद्या , बुद्धि देता है, सरकारी नौकरी, ज्योतिष , अपने प्रयास से धनवान , बचपन में कष्ट. 
२. सूर्य+शुक्र =कला, साहित्य, यांत्रिक कला का ज्ञान , क्रोध, प्रेम सम्बन्ध , बुरे, गृहस्थ बुरा , संतान में देरी , तपेदिक , पिता के लिए अशुभ। 
३. सूर्य+गुरू =मान-मर्यादा , श्रेष्टता , उच्च पद तथा यश में वृद्धि करता है, स्वयं की मेहनत से सफलता। 
४. सूर्य+ मंगल =साहसी , अग्नि से सम्बंधित कामों में सफलता , सर्जन , डॉक्टर , अधिकारी , सर में चोट, का निशान , दुर्घटना , खुद का मकान बनाये। 
५. सूर्य+चन्द्र =राजकीय ठाठ - बाठ , अधिकार, पद, उत्तम राजयोग , डॉक्टर , दो विवाह , गृहस्थ जीवन हल्का , स्त्रीयों द्वारा विरोध, बुढ़ापा उत्तम। 
६. सूर्य+शनि =पिता-पुत्र में बिगाड़ अथवा जुदाई। युवावस्था में संकट, राज दरबार बुरा। स्वास्थ कमजोर। पिता की मृत्यु , गरीबी। घरेलू अशांति। पत्नी का स्वास्थ कमजोर। 
७. सूर्य+राहू =सरकारी नौकरी में परेशानी। चमड़ी पर दाग , खर्च हो। घरेलू अशांति , परिवार की बदनामी का डर। श्वसुर की धन की स्थिति कमजोर। सूर्य को ग्रहण। 
८. सूर्य+केतू=सरकारी काम अथवा सरकारी नौकरी में उतार-चढ़ाव। संतान का फल बुरा। 
९. चन्द्रमा+मंगल=मन की स्थिति डांवाडोल। दुर्घटना। साहसिक कामों से धन लाभ। उत्तम धन। 
१०. चन्द्र+बुध=उत्तम वक्ता। बुद्धिमत्ता। लेखन शक्ति। गहन चिंतन। स्वास्थ में गड़बड़। दो विवाह योग। मानसिक असंतुलन। 
११. चन्द्र+गुरू= उत्तम स्थिति। धन प्राप्ति। बैंक में अधिकारी। उच्च पद। मान-सम्मान। धनी। यदि पाप दृष्टी हो तो विद्द्या में रूकावट। 
१२. चन्द्र+शुक्र=दो विवाह योग। अन्य स्त्री से सम्बन्ध। विलासी। शान-शौकत का प्रेमी। रात का सुख।
१३. यदि सप्तम भाव में शनि +चन्द्र की युती जातक को विधवा स्त्री दिलवा देते है।
१४. लग्न (१) भाव में सूर्य+राहू की युती दाम्पत्य जीवन में बाधा डालते है। 

१५. सप्तम भाव में बुध +शुक्र की युती ४५-५० साल की उम्र में पत्नी सुख मिलता है।

दाम्पत्य जीवन के बारे में

जानिये दाम्पत्य जीवन के बारे में :-
१. चन्द्र +राहू युति होतो - मानसिक चिंता , पति / पत्नी की मानसिक स्थिति में असंतुलन होता है। 
२. मंगल+राहू की युति से - अड़ियल स्वभाव अथवा एक दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचाना।
३. शुक्र +राहू की युति से - जातक के पत्नी के अलावा अन्य स्त्री से सम्बन्ध के कारण अथवा माता-पिता की इच्छा के बिना विवाह कारण तलाक। 
४. सूर्य+राहू - पति, पत्नि के पद , ओहदे अथवा आर्थिक स्थिति को लेकर मतभेद , तथा तलाक की नौबत।
५. शनि +राहू - एक दूसरे से अलग रहने के कारण , अशांति तथा तलाक।
६. बुध+राहू -दिमागी सोच में असमानता के कारण अशांति तथा तलाक।
७. मंगल+शुक्र+राहू -घरेलू अशांति -दुःख तथा अंत तलाक।
८. शुक्र+चन्द्र +राहू - प्रेम में घाटा ही घाटा। स्त्रीयों से हानि, घरेलू अशांति। पराई औरतों से सम्बन्ध अंत में तलाक।
यदि उपरोक्त ग्रह योग २-७ -११ वे भाव में होतो , ज्यादा प्रभावशाली है
(उपरोक्त योग होने पर अंत तलाक में होता है )

Saturday, June 21, 2014

राहू की अन्य ग्रह युति से फल

१. चन्द्र +राहू युति होतो – मानसिक चिंता , पति /
पत्नी की मानसिक स्थिति में असंतुलन
होता है।
२. मंगल+राहू की युति से – अड़ियल स्वभाव
अथवा एक दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचाना।
३. शुक्र +राहू की युति से – जातक के
पत्नी के अलावा अन्य स्त्री से
सम्बन्ध के कारण अथवा माता-पिता की इच्छा के
बिना विवाह कारण तलाक।
४. सूर्य+राहू – पति, पत्नि के पद , ओहदे अथवा आर्थिक
स्थिति को लेकर मतभेद , तथा तलाक की नौबत।
५. शनि +राहू – एक दूसरे से अलग रहने के कारण ,
अशांति तथा तलाक।
६. बुध+राहू -दिमागी सोच में असमानता के कारण
अशांति तथा तलाक।
७. मंगल+शुक्र+राहू -घरेलू अशांति -दुःख तथा अंत तलाक।
८. शुक्र+चन्द्र +राहू – प्रेम में घाटा ही घाटा।
स्त्रीयों से हानि, घरेलू अशांति। पराई औरतों से
सम्बन्ध अंत में तलाक।
यदि उपरोक्त ग्रह योग २-७ -११ वे भाव में होतो ,
ज्यादा प्रभावशाली है
(उपरोक्त योग होने पर अंत तलाक में होता है )

मोरपंख " का बहुत महत्व

= आज चर्चा . . हमारे भारत के राष्ट्रीय
पक्षी " मोर " के पंख की . .
.
= ज्योतिष में " मोरपंख " का बहुत महत्व है . .स्वयम् भगवान
कृष्ण ने अपने मुकुट में इसे धारण किया . . " मोरपंख " के प्रयोग से
हम अपने जीवन को संवार सकते है . .
.
= " मोरपंख " घर के दक्षिण-पूर्व कोण में लगाने से बरकत
बढती है. . . व अचानक कष्ट
नहीं आता है. .
.
= यदि मोर का एक पंख किसी मंदिर में
श्री राधा-कृष्ण कि मूर्ति के मुकुट में 40 दिन के लिए
स्थापित कर प्रतिदिन मक्खन-मिश्री का भोग सांयकाल
को लगाए . . 41 वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से
दक्षिणा-भोग दे कर घर लाकर अपने खजाने या लाकर्स में स्थापित
करें. . तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे कि धन,सुख-
शान्ति कि वृद्धि हो रही है. सभी रुके कार्य
भी इस प्रयोग के कारण बनते जा रहे है . . .
.
= काल-सर्प के दोष को भी दूर करने की इस
मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है.काल-सर्प वाले व्यक्ति को अपने
तकिये के खौल के अंदर 7 मोर के पंख सोमवार रात्रि काल में डालें
तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे. . . और अपने
बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख
का पंखा जिसमे कम से कम 11 मोर के पंख को लगा देने से काल सर्प
दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है. .
= बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे
ताकि पंखा चलने पर मोर के
पंखो की भी हवा बच्चे को लगे
धीरे-धीरे हठ व जिद्द कम
होती जायेगी. . .
= मोर व सर्प में शत्रुता होती है अर्थात सर्प,
शनि तथा राहू के संयोग से बनता है. यदि मोर का पंख घर के
पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में
या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू
का दोष कभी भी नहीं परेशान
करता है. तथा घर में सर्प, मच्छर, बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का भय
नहीं रहता है . .

Friday, June 20, 2014

9 महीने 9 दिन गर्भ मे बच्चा क्यो रहता है क्या है बच्चे को महान बनाने का वैज्ञानिक उपाय ?

9 महीने 9 दिन गर्भ मे बच्चा क्यो रहता है क्या है
बच्चे को महान बनाने का वैज्ञानिक उपाय ?
लोग ज्योतिष पर बहुत कम विश्वास करते है क्योकि ज्योतिषियों ने
ही ज्योतिष का विनाश किया है । उनके अधूरे ज्ञान के
कारण ऐसा हुआ है । गर्भ मे बच्चा 9 महीने और 9
दिन ही क्यो रहता है । इसका एक वैज्ञानिक आधार
है । हमारे ब्रह्मांड के 9 ग्रह
अपनी अपनी किरणों से गर्भ मे पल रहे
बच्चे को विकसित करते है । हर ग्रह अपने स्वभाव के अनुरूप
बच्चे के शरीर के भागो को विकसित करता है । अगर कोई
ग्रह गर्भ मे पल रहे बच्चे के समय कमजोर है तो उपाय से
उसको ठीक किया जा सकता है ।
गर्भ से 1 महीने तक शुक्र का प्रभाव रहता है ।
अगर गर्भावस्था के समय शुक्र कमजोर है तो शुक्र को मजबूत
करना चाहिए । अगर शुक्र मजबूत होगा तो बच्चा बहुत सुंदर
होगा । और उस समय
स्त्री को चटपटी चीजे
खानी चाहिए । शुक्र का दान न करे । अगर दान
किया तो शुक्र कमजोर हो जाएगा । कुछ
अनाड़ी ज्योतिषी अधूरे ज्ञान के कारण शुक्र
का दान करा देते है । दान सिर्फ उसी ग्रह का करे
जो पापी और क्रूर हो और उसके कारण गर्भपात
का खतरा हो ।
दूसरे महीने मंगल का प्रभाव रहता है ।
मीठा खा कर मंगल को मजबूत करे ।तथा लाल वस्त्र
ज्यादा धारण करे ।
तीसरे महीने गुरु का प्रभाव रहता है । दूध
और मीठे से बनी मिठाई या पकवान का सेवन
करे तथा पीले वस्त्र ज्यादा धारण करे ।
चौथे महीने सूर्य का प्रभाव रहता है । रसों का सेवन
करे तथा महरून वस्त्र ज्यादा धारण करे ।
पांचवे महीने चंद्र का प्रभाव रहता है । दूध और
दहि तथा चावल तथा सफ़ेद चीजों का सेवन करे तथा सफ़ेद
ज्यादा वस्त्र धारण करे ।

छटे महीने शनि का प्रभाव रहता है ।
कशीली चीजों केल्शियम और
रसों के सेवन करे तथा आसमानी वस्त्र ज्यादा धारण करे
।।
सातवे महीने बुध का प्रभाव रहता है । जूस और
फलों का खूब सेवन करे तथा हरे रंग के वस्त्र ज्यादा धारण करे ।।
आठवे महीने फिर चंद्र का तथा नौवे महीने
सूर्य का प्रभाव रहता है । इस दौरान अगर कोई ग्रह
नीच राशि गत भ्रमण कर रहा है तो उसका पूरे
महीने यज्ञ करन चाहिए । जितना गर्भ
ग्रहों की किरणों से
तपेगा उतना ही बच्चा महान और
मेधावी होगा । जैसी एक
मुर्गी अपने अंडे को ज्यादा हीट
देती है तो उसका बच्चा मजबूत पैदा होता है । अगर
हीट कम देगी तो उसका चूजा बहुत कमजोर
होगा । उसी प्रकार माँ का गर्भ
ग्रहों की किरणों से
जितना तपेगा बच्चा उतना ही मजबूत होगा । जैसे
गांधारी की आँखों की किरणों के
तेज़ से दुर्योधन का शरीर वज्र का हो गया था ।


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