Sunday, March 1, 2015

राहु देव के विषय में कुछ बात

मित्रो आज में आप लोगों से राहु देव के विषय में कुछ बात करना चाहता हूँ। राहु के पास कोई फिजिक नही है। बो आँखों से देखे जाएँ सूर्य चन्द्र की तरह ऐसा सम्भव नहीं क्यूंकि राहु देव आकाश मण्डल में अन्य सात ग्रहों की तरह उपस्थिती नहीं रखते राहु का कैसा भी स्वरूप नहीं है बो तो एक एनर्जी है जिसे ग्रेविटी कहते हैं। ग्रेविटी के विषय में ज्यादातर लोगों को मालूम होगा की वह क्या है। जिन लोगों को नहीं पता उनके लिए में बता देता हूँ। धरती पर जो भी जीव जन्तु इंसान पेड़ पौधे इमारतें आदि हैं। ईए सब ग्रेविटी के कारण ही धरती पर खड़ी हैं। और ऊपर फेंकने के बाबजूद धरती पर ही गिरती हैं । मतलब राहु के प्रभाब के बिना धरती पर जीवन सम्भव नहीं। तो एस्ट्रोलॉजी के आधार पर देखें तो राहु एक बहुत ही बड़ी शक्ति हैं।
राहु के विषय में जियोतिष में एक बात प्रचलित है की जिसे राहु तारे उसे कौन मारे और जिसे राहु मारे उसे कौन तारे। कारण भी हैं क्यूंकि जब किसी व्यकित की कुंडली में राहु अच्छे हों तो अच्छे सूर्य जैसे फ़ल देते हैं। और जब राहु बुराई पर आ जाएँ तो जीते जी ही नर्क से भी बुरे हालात बना देते हैं।
राहु देव के लिए कुंडली में घर 3 और घर6 ही अच्छे कहे गए हैं। जब किसी कुंडली में राहु के साथ मंगल हों तो भी राहु काबू में रहता है।या मंगल घर 12 खुले आकाश में हों तो भी राहु बुरा नहीं कर पाता कारण राहु को हाथी और मंगल को महावत कहा जाता है। महावत हाथी को काबू में रखता है।
इसके आलावा राहु घर 4 चन्द्र के पक्के घर में भी ज्यादा बुरे नही होते किउंकि घर 4 के मालिक चन्द्र को सभी ग्रहों की माता माना जाता है ।तो राहु माँ के घर 4 में खुद तो ज्यादा बुरे नही होते पर घर 4 से सम्बंधित मन और घर की शांति भंग कर देते हैं। माँ के जीवन में किच किच का माहौल बन जाता है।माँ की फिजिक में भी परेशानी या दर्द रहता हैं।
अब में राहु अच्छे हों तो क्या सुख मिलेंगे बताता हूँ। अच्छे राहु बाला व्यकित बड़े से बड़े काम को आसानी से पूरा करता है।किसी भी फसे हुए काम को आसानी से चुटकी में ही हल कर देगा।
बोलने चालने में हाजिर जबाब होगा। अच्छा ओहदा होगा। सरकार में और सरकारी अधिकारियो से अच्छा सम्बन्ध होगा। उसकी सलाह ले के काम किया जाये तो सफलता मिलेगी। उसको घर परिवार रुपया पैसा प्रॉपर्टी के सम्बन्ध में कोई परेशानी नहीं होगी। इज्जत मान सम्मान पूरा। क्यूंकि अच्छा राहु सूर्य का ही दूसरा रूप है।
राहु बुरे हों तो कोई सुख नहीं।घर परिवार में नित नई परेशानी खड़ी रहती है। छलावा पीछा करता रहता है।अकस्मात परेशानी एक्सिडेंट होते हैं। झूठे इल्जाम लगते हैं। बीमारी पकड़ लेती है बो भी ऐसी की डॉक्टर को आसानी से पकड़ में ना आये। पढ़ाई लिखाई का फायदा नहीं मिलता। घर के बुजर्ग खुद परेशानी में और बच्चों को भी बुजुर्गों का सुख या उनसे पैसा प्रॉपर्टी नहीं मिलती।

शुक्र ग्रह से सम्बंधित कुछ जानकारी

शुक्र देव आकाश मण्डल में सूर्य चन्द्र के बाद सबसे ज्यादा चमकने बाले ग्रह हैं। ऐ हमेशा सूर्य देव के आस पास ही भृमण करते हैं।
एस्ट्रोलॉजी में शुक्र देव को राक्षसों का गुरु माना जाता है। लेकिन सांसारिक तौर पर शुक्र का सम्बन्ध हमारे जीवन साथी प्रेमी प्रेमिका खूबसूरती घूमने फिरने शौक मौज सारीरिक जोश सुंदर वस्तुओं ग्रहथ सुख सम्भोग के सुख से है।
शुक्र देव जब घर 2 3 4 7 10 12 में हों तो अपने अच्छे फल देते हैं पर उस समय इये भी देखना जरूरी है की शुक्र के साथ दुश्मन ग्रह सूर्य राहु चंद्र ना हो और ना ही दृष्टी आदि से शुक्र को ख़राब कर रहे हों। तो ऐसे व्यकित को शुक्र के अच्छे फल मिलते हैं।
जब शुक्र अच्छे हों व्यकित को प्रेमी प्रेमिका जीवन साथी के पूरे सुख मिलते हैं। उसका साथी वफादार होता है और उनके बीच पूरी जिंदगी एक दुसरे के लिए समर्पण भाव बना रहता है।
शुक्र देव को जियोतिष् अनुसार माता लक्ष्मी भी माना जाता है क्यूंकि शुक्र देव जब अच्छे हों तो रूपया पैसा आभूषण भरपूर देते हैं। जब रुपया पैसा भरपूर मात्रा में हो तो बुद्धि भी अच्छी हो जाती है। जिस कारण व्यकित जो भी कार्य करता है उसमे सफल होता है।
शुक्र अच्छे बाले जातक को सुंदर जीवन साथी मिलता है। दोनों साथ साथ घूमते फिरते हैं। घर में साज सज्जा की सभी वस्तुएं होती हैं। घर में किसी प्रकार की कमी नहीं होती। ऐसे व्यकित का घर भी सुंदर होता है।घर में शौक मौज का पूरा सामान होता है। सम्भोग के सुख अच्छे होते हैं। शरीर में भरपूर जोश होता है। ऐसे व्यकित के घर का माहौल हमेशा प्रेममय रहता है।
लेकिन जब किसी की कुंडली में शुक्र देव नीच मन्दे या दुश्मन ग्रहों के साथ बैठ जाएँ या दृष्टि अदि से पीड़ित हों तो शुक्र के बुरे फल मिलते हैं।
बुरे शुक्र बाला जातक दुसरे जोड़ों जो प्यार से रहते हैं घुमते फिरते हैं उनसे जलता भुनता है और उनके प्यार मोह्हबत में बुराई ढूँढता रहता है। ऐसे व्यकित के सरीर में जोश की कमी हो जाती है।
उसे हर समय आलस घेरे रहता है।जिस कारण ऐसा जातक सुबह जल्दी बिस्तर नहीं छोड़ता जिस कारण से शुक्र के फल और भी बुरे हो जाते हैं।
ऐसे व्यकित के घर में धुल मिटटी गन्दगी रहती है। घर का सामान सलीके तरीके से सही जगह नहीं होता यंहां वंहा बिखरा रहता है। साज सज्जा का सामान खरीदने के पैसे नहीं होते।रुपया पैसा की कमी बनी रहती है।
शुक्र का सम्बन्ध राहू के साथ हो जाये तो आपस में शक वहम मार पीट तक होती है।ऐसे जातक को गुप्त रोग हो जाते हैं।नपुनशक्ता तक हो जाती है। ऐसा व्यकित अपने साथी को तंग ही करता है।
शुक्र का सम्बन्ध सूर्य के साथ होने से सम्भोग की इच्छा बहुत कम हो जाती है। वो भी जीवन साथी को खुश नहीं रख पाता।खुद के व् साथी के शरीर में अंदरूनी कमजोरी हो जाती है जो आशानी से पकड़ में नहीं आती।
जब शुक्र का सम्बन्ध चंद्र देव के साथ हो जाये तो ऐसे जातक का सम्बन्ध अपनी सास के साथ अच्छा नहीं होता। अगर ऐसा योग लड़की की कुंडली में हो तो उसे सास की तरफ से कभी चैन नहीं मिलता। सास के साथ सम्बन्ध ख़राब ही रहते हैं। ऐसे व्यकित की माँ को आँखों या चमड़ी से सम्बंधित बीमारी घेर लेती है और खुद भी आँखों या चमड़ी की बीमारी से परेशान होता है।

मंगल देव के विषय में कुछ जानकारी

सबसे पहले ध्यान देने की बात है की मंगल कब अच्छे और कब ख़राब हो जाते हैं।
जब मंगल का सम्बन्ध केतु या बुध के साथ हो जाये चाहे बो एक साथ हों या दृस्टि से मिल रहे हों तो भी मंगल का फल ख़राब हो जाता है।
जब सूर्य और शनि मिल जाते हैं तब भी मंगल बुरे हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त और भी कई प्रकार से मंगल के गुण अवगुण में बदल जाते हैं।
लेकिन जब मंगल देव अच्छे होते हैं तो क्या सुख मिलते हैं।पूर्ण पराक्रमी अच्छी हिम्मत बाला बिलकुल हनुमान जी की तरह जिसके साथ लग जाये उसके लिए अपना बलिदान तक दे दे।
एक दम सीधा साधा इंसान ज्यादा चंट चालक नहीं होता। मंगल अच्छे तो भाई यार दोस्तों के लिए पूरा सहायक और बो भी ऐसे व्यकित के लिए पूर्ण समर्पित होते हैं।
और सबकी पूरी स्पोर्ट भी मिलती है। जीवन में कभी खून से सम्बंधित बीमारी नहीं होती। 15 साल की उम्र से हालात अच्छे होने शुरू हो जाते हैं।28 से 33 साल की उम्र में पूरी तरह से ऊंचाइयों को पा लेता है।
घर में मंगल कारज जल्दी जल्दी होते हैं। घर के बच्चों के शादी व्याह सही समय पर होते हैं।
लेकिन अगर मंगल देव आपकी कुंडली में नीच के बद होके अर्थात ख़राब हो के बैठे हो तो घर का माहौल अच्छा नहीं होता भाई भाई में दुश्मनी हो जाती है।माँ बाप ही बच्चों में बिगड़बाते हैं। आपस में घर के सदस्य एक दुसरे से जलते हैं। 15 साल की उम्र से बच्चा बिगड़ना शुरू कर देता है।पढ़ाई लिखाई चौपट ।कँही भी टिकता नहीं।धैर्य कम हो जाता है। भटकाव बढ़ने लगता है। किसी पर विषबास् नहीं करता।।बुरी सोहबत में पड़ जाता है। बुरे यार दोस्तों के साथ घूमता फिरता है और फालतू के झगड़े करता है। भाई भाई में भी लड़ाई झगड़े होते हैं जो दुनिया देखती है
जीवन में अस्थिरता बनी रहती है। आस पड़ोस के लोगों से भी अनबन का माहौल रहता है।घर में खुशियों का माहौल नहीं बन पाता ।शादी व्याह बड़ी उम्र में होते हैं। एक बात और ऐसे हालात में 28 से 33 साल की उम्र के बीच परिवार टूटते हैं।

रोजमर्रा में होने बाली बिमारियों के विषय में

मित्रो लाल किताब जिओतिष में किसी की भी जन्म कुंडली देख कर आसानी से इये पता चल जाता है कि अमुक व्यक्ति को किस उम्र में और कौन सी बीमारी हो जायगी। और सही समय पर कुंडली दिखा कर लाल किताब के उपाय कर लिए जाएँ तो इन बुरी बिमारियों से बचाव आसानी से सम्भव है।
1-गुस्सा ज्यादा, जब किसी की कुंडली में सूर्य घर 1 में हो,सूर्य मंगल एक साथ हों,सूर्य शनि एक साथ या सूर्य शनि मंगल एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति को ज्यादा गुस्सा और जल्दी ही गुस्सा आ जाता है।
2- बुध मंगल एक साथ हों तो ऐसे व्यक्ति को खून से सम्बंधित परेशानी से गुजरना होता है साथ ही जब मंगल के कारण से बुध ज्यादा खराब हो जाये तो BP की परेशानी साथ ही मंगल बुध दोनों ज्यादा बुरे हाल तो पागल पन की बीमारी हो जाती है। और गैस एसिडिटी कब्ज की भी शिकायत रहती है। इस योग के कारण लिवर से सम्बंधित बीमारी भी हो जाती हैं।
3- मंगल शनि का योग भी गैस की परेशानी देता है।
4- शनि देव घर 1 में हों तो भी गैस की प्रॉब्लम देते हैं।
5- सूर्य शुक्र एक साथ हों तो शरीर में जोश की कमी हो जाती है। ऐसे व्यक्ति में सेक्स की छमता कमजोर हो जाती है। जीवन साथी के शरीर में भी अंदरूनी बीमारी हो जाती है।
6- राहू शुक्र के मिलने से व्यक्ति को नपुंष्कता अनुभव होती है। किउंकि ऐसा व्यक्ति कम उम्र में ही अपने वीर्य हो नष्ट कर लेता है। वीर्य से सम्बंधित बीमारी जैसे स्पर्म की कमी आदि, इसके अतिरिक्त शरीर में कैलशियम की कमी हो जाती है।
7- बुध और गुरु देव व्रहष्पति मिलते हों तो अस्थमा साइनस की बीमारी हो जाती है। इये दोनों जिस घर में बैठे हों उस घर से सम्बंधित बीमारी भी देते हैं। जैसे दोनों घर 7,12 में बैठ जाएँ तो नपुंष्क तक बना देते हैं।
8- सूर्य बुध राहू मिलते हों तो आथरायटिश की बीमारी देते हैं।
9- सूर्य नीच का या शनि राहू के साथ सम्बन्ध बना ले और गुरु बुध या गुरु राहू का योग हो जाये तो पीलिया जैसी गन्दी बीमारी जीवन में कई बार होती है।
10- जिस व्यक्ति की कुंडली में केतु देव नीच के होंगे उसके कमर पाँवो जोड़ों में दर्द की शिकायत बनी रहेगी। साथ ही उसे पेशाब और किडनी के परेशानी भी देते हैं।
11-बुध गुरु,राहू गुरु दिमाग को सही डारेक्सन नहीं मिलने देते। अजीब अजीब सी भ्रांतियां होती हैं।
12- मंगल बुध एक साथ और सूर्य शनि भी मिल रहे हों तो कैंसर जैसी बुरी बीमारी बन जाती है। 
13- राहू गुरु मिलते हों तो अस्थमा t b(तपेदिक) फेफड़ों से सम्बंधित और साँस की तकलीफ देते हैं।
14- चन्द्र देव जब शुक्र देव के साथ मिलते हो तो आँखों और चमड़ी से सम्बंधित बीमारी जैसे सफेद दाग,चमड़ी पर चककत्ते आदि हो जाते हैं।
15- चन्द्र बुध जिस जातक की कुंडली में मिलते हों बो व्यक्ति बहुत ही जिददी हो जाता है और जिद ज्यादा होने के कारण किसी की बात नहीं मानता और अपना जीवन नर्क बना लेता है।
16- सूर्य मंगल बुध या बुध मंगल मिलते हों तो ऐसे व्यक्ति को B P हाई की दिक्कत कम उम्र में शुरू हो जाती है। नशों नाड़ियों में ब्लोकेज हो जाते हैं। खून से सम्बंधित बीमारी परेशानी खड़ी रहती है।
16- केतु खराब नीच के मन्दे हों और गुरु देव भी बुरे हाल साथ ही चन्द्र देव भी नीच मन्दे हों तो नर औलाद पैदा करने की शक्ति नष्ट हो जाती है। बेशक कन्या सन्तान पैदा हो जाये।

व्यापार काम काज और नौकरी से सम्बंधित जानकारी

मित्रो आज में आपको लाल किताब जियोतिष के अनुसार व्यापार काम काज और नौकरी से सम्बंधित जानकारी आपको दे रहा हूँ।
साथ ही कुछ उपाय जिनको करके आप अच्छी जिंदगी गुजार सकते हैं।
भाइयो हम सब में से कौन नही जनता की रुपया पैसा कन्हा से आता है। हमारे घरों का गुजारा कन्हा से चलता है। बात साफ है काम काज व्यापार नौकरी से तो भाइयो संसारिक और पारिवारिक तौर पर काम काज नौकरी की सबसे ज्यादा जरूरत है बो भी अच्छे हालात में, जिन लोगों की जन्म कुंडली में बुध देव अच्छे और एक दम साफ सुथरे हालात में बैठे हों तो ऐसे व्यक्ति को उच्च कोटि का व्यापारी बनाते हैं। ऐसा व्यकति कम मेहनत में ही सिर्फ बातों ही बातों में भरपूर कमाई करता है। 
लेकिन बुध देव जिनकी जन्म कुंडली में नीच के बुरे या अपने दुश्मन ग्रहों के साथ बैठे हों तो काम काज व्यापार में नित नई परेशानी खड़ी रहती है। 
जो लोग टिरेडिंग व्यापार करते हैं। उनका घर 7 भी खराब हो तो उपरोक्त परेशानी और भी ज्यादा बढ़ती जाती है। किउंकि घर 7 रोजाना होने बाली इनकम का होता है। इस कारण घर 7 का अच्छा होना भी जरूरी है तब ही डेली सोर्स ऑफ़ इनकम अच्छी हो सकती है। 
जिन लोगों की कुंडली में बुध खराब हों साथ ही घर 7 में भी सूर्य,राहु,या गुरु में से कोई भी एक या 2 मिलकर बैठ जाएँ तो व्यापर ना करें नौकरी करें या दलाली कमीसन का काम करें। 
यहाँ पर में एक बात और बता दूं जब बुध देव मन्दे नीच के होते हैं तो बुध का ज्यादा बुरा असर 34 35 साल की उम्र में होता है। साथ ही जब बुध देव बुरे हों तो 34 साल की उम्र में बुध देव पहले अच्छे हलात बनाते हैं। फिर 35 साल की उम्र पूरी होते होते ऐसा जमीन पर पटकते हैं की जातक वर्षों तक दुबारा उठ ही नही पता। बुध खराब की एक और पहचान है कि 99 से बापसी जिनका बुध खराब बो लोग 100 तक कभी नही पहुँचते।
इसके आलावा काम काज व्यापार और नौकरी को खराब करने में घर 10 का भी बड़ा योगदान होता है। घर 10 को कुंडली में काम काज और नौकरी का घर माना जाता है। लेकिन जब घर 10 में आपस में दुश्मन ग्रह एक साथ बैठ जाएँ तब भी काम काज नौकरी में परेशानी बनी रहती है। काम काज नौकरी बार बार बदलते हैं।
मित्रो आज में उपरोक्त हालात के विषय में कुछ खास बातें भी आप के सामने रख रहा हूँ। जिनको पड़ने के बाद बो लोग जिन्होंने इन हालात में जिंदगी गुजारी होगी सोच में पड़ जायेंगे की लाल किताब जियोतिष् में ऐसा क्या है की किसी व्यकति के हालात को इतने अच्छे प्रकार से बताया जा सकता है। जब बुध खराब हों तो हमेशा अच्छी प्रकार से चलते हुए काम काज में अकस्मात प्रॉब्लम परेशानी होती है। पहले सब ठीक होता है पर अकस्मात छलावा सा होता है।और सब कुछ नष्ट होने लगता है। ऐसे व्यकति को पता ही नही चलता की क्या हुआ। बर्बादी के कारण क्या हैं। अपनी आँखों से देख कर यकीन ही नहीं होता और बर्बादी सामने खड़ी होती है। दिमाग काम करना बन्द कर देता है। मन में दिमाग में अजीब सी भ्रांतियां घर कर लेतीं हैं। उसकी बुद्धि काम ही नहीं कर पाती।
एक खास बात और जब किसी की कुंडली में बुध देव उपरोक्त हालात के होते हैं। तो बैंक या फाइनेंसर से कर्जा भी करबा देते है और ऐसा जातक जिसका बुध ख़राब हो कर्जा चुकता नहीं कर पाता इस कारण ऐसे व्यकति की समाज में इज्जत मान भी नष्ट हो जाता है।
मित्रो अगर आपकी कुंडली में बुध खराब हों तो बुध से सम्बंधित सामान अपने तन और घर से दूर करें।
बुध देव जिस भी दुश्मन ग्रह के साथ हों तो बुध के साथ उस ग्रह का भी इलाज करें।
घर 10 में आपस में दुश्मन ग्रह एक साथ बैठे हों तो हर 2, 3 महीने में 10 अंधे मर्दों को खाना खिलाये
सिर्फ इतनी सी रेमेडी करके आप बुरे हालात से बच सकते हैं। और बो भी बहुत आसानी से की जा सकती हैं। ज्यादा खर्चीली नहीं हैं। और हाँ मित्रो इतनी आसानी से किये जा सकने बाले उपाय सिर्फ लाल किताब जियोतिष् में ही सम्भव हैं। साथ ही इन उपायों का अच्छा असर भी बहुत ही जल्दी होता है।

मंगल ख़राब (बद) के उपाय

लाल किताब जियोतिष् के अनुसार आपकी जन्म कुंडली में अगर आपके मंगल ख़राब (बद) हैं। तो निम्न लिखित सावधानियां अपनाएं।
1-शहद सौंफ़ और छुआरे का घर पर स्टॉक ना रखें।
2-साऊथ फेसिंग घर में ना रहें। अगर आप का घर पहले से ही साऊथ फेसिंग है तो घर के एन्ट्री पॉईंट पर चौखट पर ऊपर की तरफ 3 लोहे की कीलें पताशे बाली ठोक दें। और घर को जल्दी से जल्दी बदल दें।
3-घर के सामने पार्क मैदान ना हो जन्हा धूल मिटटी उड़ती हो।
4-घर के सामने नीम बेरी कीकर और कटा फटा लुंड मुंड सा पीपल का पेड़ ना हो
5-घर में पुराने समय की भट्टी जो जमीन खोद कर बनाई जाती थी ना हो और उस समय की उन भट्टियों की जली हुई लाल मिटटी भी ना हो।
6-घर में बड़ी बड़ी भट्टियां , मिटटी या बिजली का तन्दूर ना रखें।
7-तला खाना ना खाएं।
8-अपने मित्रों , भाइयों के साथ मीठे मिठाई की दावत हर मंगल बार को करें।
9-भाइयों और मित्रों की गलती को माफ़ करते रहें।
10-मसूर की दाल का सेवन ना करें।
11-अपने और परिवार के सभी सदस्यों के शरीर पर ज्यादा से ज्यादा चांदी धारण करवाएं।

प्रेम विवाह योग

प्रेम विवाह -पुराने समय से ही होते आये हैं। और हो रहे हैं। और आगे भी होते रहेंगे। चाहे हमारा समाज इस कृत्य को अच्छी या बुरी किसी भी दृषिट से देखे। 
हमारे नवयुवक प्रेम विवाह करते रहेंगे। 
सच्चाई ईए है की कुछ जन्म कुंडलियों में एसे योग होते हैं। कि नव युवक समाज परिवार की परवाह किये बिना ऐसा करने को मजबूर हो जाते हैं।
इये योग में बताता हूँ। जब किसी की कुंडली में घर 1 का सम्बन्ध घर 5 7 से बन जाता है। 1 5 7 के मालिक ग्रह एक दूसरे के घरों में बैठ जाएँ या दृस्टी सम्बन्ध बनायें तो प्रेम विवाह होता है। साथ ही जब घर 12 का सम्बन्ध घर 5 7 से से बने तब भी प्रेम विवाह होता है।12 5 7 के ग्रह एक दुसरे के घरों में बैठ जाएँ या दृस्टि सम्बन्ध बना लें।
लेकिन किसी का घर 5 का मालिक ग्रह घर 12 में बैठ जाये ध्यान दें घर 12 में बैठ जाये तो उसका प्रेमी उसे छोड़ के चला जाता है। धोखा देता है।
साथ ही जब किसी का शुक्र ग्रह जब घर 8 में बैठ जाये या राहु घर 5 में हो तो प्रेम विवाह सम्भव नहीं होता।
और किसी की कुंडली में शुक्र देव घर 5 में बैठ जाएँ तो उसे प्रेम विवाह करना तो क्या ऐसा सोचना भी नहीं चाहिए। क्यूंकि अगर ऐसा व्यकित प्रेम विवाह परिवार की इच्छा के खिलाफ जाके करता है तो बाद में उसे बहुत बड़ी परेशानियां उठानी पड़ेंगी। बर्बाद हो जायेगा। इज्जत मान सम्मान रुपया पैसा की भारी कमी रहेगी।
विवाह (ऑरेन्ज मैरिज) हमारे प्राचीन जियोतिष् के अनुसार विवाह के समय गुण मिलान किया जाता है। उसमे 36 गुण में से 18 या 18 से ज्यादा मिलने पर जियोतशी बोल देते हैं विवाह कर दो गुण मिल रहे हैं ।पर उसमे भी भकूट और नाडी दोष को देखना चाहिए।नाडी और भकूट देखे बिना विवाह के बाद परेसानी आतीं हैं।
यहां में सभी को एक बात और बताना चाहता हूँ की कुछ विद्वान् बोलते नाम से भी गुण मिलान करते हैं जब किसी की कुंडली ना हो। जोकि सरासर गलत है ।गुण मिलान हमेशा कुंडली देख के ही किया जाता है।
इतना सब होने के बाद भी वैदिक जियोतिश में कुंडली मिलान का बहुत ही छोटा स्वरूप् है जो ज्यादा कामयाब नहीं है।
लाल किताब में कुंडली मिलान का बहुत ही सुंदर और कामयाब स्वरूप् है।जिसका पालन करने से वैवाहिक सम्बंधों का पूरा आनन्द लिया जा सकता है। क्यूंकि लाल किताब में घर 2 ससुराल का सुख घर 4 घर का माहौल घर 7 पति से या पत्नी से सम्बन्ध घर 12 बिस्तर के सुख। लाल किताब में इन सभी बातों को देखा जाता है चाहे गुण 18 मिलें या 18 से भी कम उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
लाल किताब में उपरोक्त बातों का ध्यान करके गुण मिलान किया जाता है जो ज्यादा सटीक है।
एक बात और 2 4 7 12 घरों में पापी या मंदे नीच ग्रह बैठे हों तो वैवाहिक सम्बन्धों को ख़राब करते हैं।तलाक करबाते हैं।आपस में मार पीट क्लेश होता है।
एक बात और में यहाँ साफ कर देना चाहता हूँ की वैवाहिक सम्बन्धो का सबसे बड़ा कारक ग्रह शुक्र है
अगर किसी की कुंडली में शुक्र के साथ सूर्य राहु या केतु बैठ जाएँ तो भी सम्बन्ध ख़राब हो जाते हैं।
किसी की कुंडली में शुक्र के पक्के घर 7 में सूर्य या राहु बैठ जाएँ तो भी उसकी वैवाहिक जिंदगी नस्ट हो जाती है।
लेकिन में इये बात दावे से कहता हूँ क़ि घबराने की जरूरत नहीं लाल किताब में ऐसे सभी दोषों का इलाज है। आप लाल किताब के उपाय करके अच्छी जिंदगी जी सकते हैं।