Monday, February 29, 2016

मांगपत्र

प्रतिष्ठा में ,
माननीय प्रधानमंत्री
भारत सरकार
नई दिल्ली।
विषय: मौलिक भारत ट्रस्ट के राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुरूप मांगपत्र
माननीय महोदय,
        हमारी संस्था देशभर के राष्ट्रवादियों और भारत से प्रेम करने वाले लोगों का संगठन है जो एक दबाब समूह और सामाजिक सक्रियता और संघर्ष के माध्यम से सुशासन, चुनाव सुधर, पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन के साथ ही व्यवस्था में भारत की मौलिक संस्कृति और सोच के अनुरूप परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहा है। हमारे पिछले वर्षों में किये गए कार्यों का विवरण संलग्न पुस्तिका में वर्णित है।
  आज दिनांक 27 फरवरी 2016 को हम सभी सदस्य सर्वसम्मति से राष्ट्रहित में निम्न प्रस्ताव पारित कर आपसे इसके तुरंत और प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते हें -
1. देश में अनेक राजनीतिक दलों ने राष्ट्रवाद की परिभाषा को उलझाने की कोशिश की है और प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से देशद्रोहियों व आतंकियों के साथ अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उनके साथ खड़े दिखायी दे रहे हें, जो चिंताजनक है और हमारे सैन्य बलों का मनोबल तोड़ने वाला भी। आपसे अनुरोध है की पुनः राष्ट्रवाद, राष्ट्रहित एवं अभिव्यक्ति की आजादी की कानूनी परिभाषा से देश की जनता एवं शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं को स्पष्ट की जाये ताकि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का भ्रम खड़ा कर आंतरिक और बाह्य तकते देश को बाँटने और अराजकता की बढ़ाने की कोशिश न कर सकें।
2. हमारी मांग है कि देश के सभी राजनीतिक एवं गैर सरकारी व सामाजिक संगठनो एवं मीडिया समूहों की गहन जाँच पड़ताल हो और देश में अराजकता और विभाजन फेलाने में उनकी भूमिका की है या नहीं इसकी जाँच हो और अगर कुछ गलत पाया जाये तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाये।
3 . सभी दलों, सामाजिक संगठनों, विदेशी अनुदान से चलने वाली संस्थाओं व मीडिया समूहों से देश के संविधान के अनुरूप कार्य करते रहने के लिए शपथ पत्र लिया जाये।
4. देश में चल रही आरक्षण नीति की पुनर्समीक्षा हेतू गैर राजनितिक समिति बनायी जाये।
5. देश में दंगो, हिंसा, आतंक और आपदा के समय प्रभावित होने वाले लोगो के हितो की रक्षा हेतू राष्ट्रीय नीति बनायी जाये और सरकारी मंत्री और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाये। दोषियों को सजा और विशेष न्यायालय बनाये जाएं जो तय समय में अपना निर्णय दे।
6. देश की अर्थव्यवस्था को आयत आधारित बनते जाने से रोका जाये और देसी, कृषि आधारित एवं रोजगारोन्मुख उद्योग व व्यापार को बढ़ावा दिया जाये।
7. यू पी ए सरकार के पिछले दो कार्यकालों में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी किया जाये। साथ ही काली अर्थव्यवस्था, सट्टे, कालाबाजारी, जमाखोरी और मिलावट पर रोक लगाने के स्थायी उपाय किये जाएं।
8. पिछले 4-5 बर्षों में खुले घोटालॉ की जाँच बहुत धीमी चल रही है, इसे समयबद्ध तरीके से निबटाकर दोषियों को शीघ्र दंड दिया जाये।
9. देश में वृहद चुनाव सुधार समय की आवश्यकता हें, विधि आयोग एवं संसदीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप इन्हें लागू करने की कार्ययोजना सरकार देश के सामने रखे।
10. संचार, मीडिया एवं फिल्मों में अश्लीलता, नशे, पश्चात्यता और सट्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, इस पर तत्काल नियंत्रण जरुरी है।
धन्यवाद।
भवदीय दिनांक 27 फरवरी, 2016
समस्त सदस्य
मौलिक भारत ट्रस्ट

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