Tuesday, November 3, 2015

ईश्वर

ईश्वर (सत्य)
भगवान एक ऐसी महाशक्ति है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, और उसमे जीवन निर्वाह कर रहे प्रत्येक जीव और निर्जीव वस्तु में विधमान है ! और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और उसमे रहने वाले प्रत्येक जीव-जंतु उसके ऋणी है, और उसके आदेशो का पालन करना, उनका धर्म हैं ! वह ऐसा ईश्वर है, जिसमे हर प्रकार की प्रसंशा के गुण समाहित हैं ! उसकी पूजा करने या न करने से उसकी सत्यता पर कोई प्रभाव नही पड़ने वाला ! और न ही उसकी पूजा करने के लिए उसने किसी को बाध्य किया ! बल्कि उसकी पवित्रता और सत्यता को देखकर हम विवश हो जाते हैं उससे मानने और उसकी पूजा करने के लिए ! और वो ऐसी अदभुत शक्ति है जिसे चाह कर भी झुठलाया नहीं जा सकता ! सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर राज करने वाला वो इकलौता ईश्वर ही पूज्निये है! और उसके अलावा किसी और की पूजा करना महापाप है! वो किसी के द्वारा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उसके द्वारा रचा गया, हमेशा से जीवंत, सत्य का साथी, सभी प्राणियों के हृदय में विराजमान, दुखिया का सहारा, पूंजीपतियों का लाभ, प्रत्येक व्यक्ति की आस्था, मोक्ष तक पहुँचने का रास्ता, धर्मो की नहीं बल्कि हृदय की सच्ची पुकार सुनने वाला, बिना आकर और बिना सूरत वाला ईश्वर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में आलौकिक शक्तियों के साथ आज भी जीवंत है ! और यही सत्य (ईश्वर) है !
या आप इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं-
“वह तेजस्वियों का तेज, बलियों का बल, ज्ञानियों का ज्ञान, मुनियों का तप, कवियों का रस, ऋषियों (पीर, फकीर, दरवेश, बाबा, भक्त) का गाम्भीर्य और बालक की हंसी में विराजमान है। ऋषि के मन्त्र गान और बालक की निष्कपट हंसी उसे एक जैसी ही प्रिय हैं। वह शब्द नहीं भाव पढता है, होंठ नहीं हृदय देखता है, वह मंदिर में नहीं, मस्जिद में नहीं, प्रेम करने वाले के हृदय में रहता है। बुद्धिमानों की बुद्धियों के लिए वह पहेली है पर एक निष्कपट मासूम को वह सदा उपलब्ध है। वह कुछ अलग ही है। पैसे से वह मिलता नहीं और प्रेम रखने वालों को वो कभी छोड़ता नहीं। उसे डरने वाले पसंद नहीं, प्रेम करने वालो को उसे ढून्ढने की ज़रूरत नहीं। सबसे अलग, सबसे शक्तिशाली, सभी में विराजमान और सबके हृदय में धड़कने वाला वो एक ईश्वर (सत्य, विश्वास) ही है।“
यदि हम ईश्वर को अपने दिल और हर जीवित वस्तु में नहीं देख सकते तो, हम ईश्वर को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का भ्रमण करके भी प्राप्त नहीं कर सकते

No comments:

Post a Comment